सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
DevanagariHindipublished288 पृष्ठ
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सायन सूर्य जानने की स्थूल रीति : १९३
| १५ स्वाता. | ठ २०/४ | डी द ठे दो प=ख | जव हुस्त के |
|---|---|---|---|
| १६ विमल. | प १२/४ | भी भू बे धो धो | दूसरे चरण का |
| १७ मनु. | क २४/३ ती १६/१ तु १६/२ ते १६/३ तो १६/४ | धी धू घे धी | जन्म होता है तो |
| १८ कल. | क २६/३ | व अक्षर होने से | |
| १९ मृग. | क २६/३ ती २४/४ दू २६/१ दे २७/१ दो २७/२ | उसे ख मालकर | |
| २० मृ. घन. | क २०/२ | नाम रख देते हैं | |
| २१ ठ. मल. | ता १७/१ ती १७/२ तु १७/३ ते १७/४ ती १८/१ | जीसे— | |
| २२ खल. | पा १२/१ ती १२/४ प्र १२/१ ते १४/१ ती १४/२ | पराराध= | |
| २३ घति. | पा २०/३ | फी फू फे फो | खरागम |
| २४ शत. | भ १८/३ भी १४/४ भू २०/१ ये २१/१ भी २२/२ | षडान्त= | |
| २५ पू. पा. | भा १०/१ भी १०/२ भू १०/३ ये १०/४ भी ११/१ | खंडान | |
| २६ ल. भा. | भा १५/२ ती १५/३ भू १५/४ ये १५/१ भी १५/३ | ||
| २७ श्वती | रा १४/३ ही १४/४ क १४/१ दे १४/२ दो १४/३ | ||
| ल १/४ लो २/१ लू २/२ ले २/३ लो २/४ | |||
| वा ४/२ ली ४/३ लू ४/४ वे ४/१ लो ४/२ | |||
| व १२/२ | |||
| सा २४/२ ली २४/४ भू २४/२ वे २४/१ लो २४/२ |
क. अ. प्र. = इन अक्षरों से नाम नहीं बनता तो इसके बदले "न" या सौर कोई भी अक्षर नाम रख देते हैं।
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