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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१६४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

अध्याय ३७

तारीख से तिथि निकालना

सुवर्णांक १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९ विशेषांक ० ११ २२ ३ १४ २५ ६ १७ २८ ९ २० १ १२ २३ ४ १५ २६ ७ १८ आरम्भ महीना=मार्च को पहिला गिनो।

आरम्भ में विशेषांक शून्य है जिसका श्रेपक ११ है अर्थात् प्रतिदिन ११ बढ़ता है। जैसे ११+११=२२+११=३३ इसका ३ ही लिया ३+११=१४, =१४+११=२५। इसी प्रकार ये विशेषांक ऊपर दिये हैं। ३० से अधिक तिथि होने पर ३० घटाने से जो बचता है वही ऊपर चक्र में .....। जैसे २२+११=३३ का ३० घटा कर ३ ही विशेषांक रखा है।

सुवर्णांक Golden number=सन ईस्वी+१=शेष सुवर्णांक का क्रम।

(शाका+७८)=सन ईस्वी।

जैसे शाका १८६५+७८=१९४३ सन्। १९४३+१=१९४४=शेष ६। शेष ६ बचा तो १९४३ सन का सुवर्णांक=६ हुआ। इस सुवर्णांक १९ ) १९४४ ( १०२ ६ के नीचे विशेषांक २५ दिया है। इस वर्ष भर के लिए

इसी विशेषांक से तिथि निकलेगी।

४४

३८

६ शेष

रीति—सन् ईस्वी में १ जोड़ कर १९ का भाग दो जो शेष बचे वह सुवर्णांक होगा। उस सुवर्णांक के नीचे जो विशेषांक मिले उसे लो। फिर जिस अंग्रेजी महीने की तारीख की तिथि जाननी हो, मार्च से उस अंग्रेजी महीने तक गिनो, गिनते समय मार्च को १ गिनो। गिनती में महीने की जो संख्या आवे उसे मास संख्या कहते हैं।

महीने की तारीख+विशेषांक=मास संख्या=तिथि।

महीने की तारीख, विशेषांक और मास संख्या जोड़ने से तिथि निकलती है। तिथि ३० से अधिक आवे तो ३० घटाने से जो बचे उसे लेना। पूर्णिमा को १५ और अमावस्या को ३० तिथि जानो।

सब योग १ से १५ तक आवे तो=शुक्ल पक्ष की तिथियाँ होंगी।

“ १६ से ३० “ “ “=कृष्ण “ “ “

जैसे सन् १९४३ ई० की ७ अप्रैल की तिथि जाननी है। सन् १९४३ का सुवर्णांक ६ निकला था, इसका विशेषांक २५ है, इष्ट मास अप्रैल है। मार्च से गिना, मार्च १, अप्रैल २, इस प्रकार मास संख्या २ हुई।