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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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तारीख से तिथि निकालना : १९९

मासांक और वारांक

अंक
मासजनवरीमईलीप-फरवरीजूनसितम्बरलीप--जनवरी
अक्टूबरफरवरीमार्चदिसम्बरअप्रैल
अगस्तनवम्बरजुलाई

दिन रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरुवार शुक्रवार शनिवार

इस चक्र में महीने के ऊपर जो अंक दिए हैं वे मासांक हैं और दिन के ऊपर के अंक वारांक हैं।

रीति सन् ईस्वी का उत्तरार्द्ध अर्थात् इकाई और दहाई को लेकर उस उत्तरार्द्ध का चतुर्थांश भी उसी में जोड़ दो। चतुर्थांश निकालते समय आधा या पौन अंक मिले उसे जोड़ते समय छोड़ देना चाहिए। उस योग फल में तारीख और अंग्रेजी महीने का अंक ( मासांक ) भी जोड़ दो और ७ का भाग दो जो शेष बचे वही बार उपर्युक्त क्रम से होगा।

जैसे सन् १९४३ में २३ मई का दिन जानना है, सन् १९४३ का उत्तरार्द्ध ४३ हुआ=४३ + ४३=४३ + १०३=५३ (यहाँ जोड़ते समय ३ छोड़ दिया)=५३+तारीख २३+मई का मासांक २=७५। ७५+७=शेष १ रविवार। यहाँ मई के ऊपर २ अंक लिखा हैं इससे मई का मासांक २ हुआ। सब का योग ७५ था, ७ का भाग देने से १ बचा, १ के नीचे इतवार लिखा है। इससे प्रकट हुआ कि २३ मई सन् १९४३ को इतवार का दिन था।

बीसवीं सदी में उपर्युक्त नियम से तारीख का दिन निकालना है। परन्तु इसके पहिले की गत सदी की तारीख जानने के लिए प्रति सदी में २ अधिक जोड़ना और भविष्य की सदी में २ अंक घटा देना होगा, तब ठीक तारीख निकलेगी।

लीप फरवरी हो तो लीप वर्ष में जनवरी और फरवरी की तारीख से दिन निकालने में कुछ सावधानी की आवश्यकता है। ऊपर चक्र में लीप फरवरी और लीप जनवरी जहाँ लिखा है उस वर्ष उसके ऊपर लिखा मासांक को अर्थात् लीप जनवरी का निकालने को लीप जनवरी का विशेषांक ० या ७ लेना और लीप फरवरी के लिए मासांक ३ लेना। क्योंकि लीप फरवरी के ऊपर ३ अंक लिखा है। यदि लीप वर्ष न हो तो साधारण जनवरी का अंक १ और फरवरी का साधारण अंक ४ लेना जैसा पहिले चक्र में बता चुके हैं।

लीप वर्ष ( Leap year )=प्लुत वर्ष। जिस वर्ष में सन् ईस्वी में ४ का पूरा २ भाग चला जाय या पूर्ण सदी हो तो उसमें ४०० का भाग पूरा २ चला जाय अर्थात् भाग देने से शेष कुछ न बचे तो वह लीप इयर (प्लुतवर्ष) कहलाता है। जैसे ४, ८, १२, ८८, १२, १६ में ४ का भाग पूरा २ चला जाता है। शेष कुछ नहीं बचता ता ये सब लीप वर्ष होंगे। और ४००, ८००, १२००, १६००, २०००, इत्यादि इन ईस्वी में जिसमें सदी शेष कुछ नहीं बचता तो ये सब लीप वर्ष कहलायेंगे,