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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२७४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

नक्षत्रघंमि०से०नक्षत्रघंमि०से०नक्षत्रघंमि०से०
१ अश्विनी१४२३.४११ पूर्वा फाल्गुनी१११५.४२१ उत्तराषाढ़ा१८३६४३.३
२ भरणी४४२६.६१२ उत्तराफाल्गुनी११४४१२.९२२ अभि०१८३३४३.३
३ कृत्तिका४१५०.११३ हस्त१२२४५६.९२३ श्रवण१९४६८.९
४ रोहिणी३०२८.११४ चित्रा१३२०११.२२४ धनि०२०३५१३.५
५ मृग०२९५४.११५ स्वाती१४१११९.७२५ शत०२२४७३९.५
६ आर्द्रा०२१३.५१६ विशाखा१५४५३७.३२६ पूर्वा भाद्रपद३३००१.७
७ पुनर्वसु३९१७.६१७ अनुराधा१५३४४२.८२७ उत्तरा भाद्रपद२०.६
८ पुष्य३९१७.६१८ ज्येष्ठा१६२३६४.५२८ रेवती४६.०
९ अश्लेषा५०२२.४१९ मूल१७१७९.४२५१२.२
१० मघा१०१८.८२० पूर्वाषाढ़ा१८२२६.५

स्थूल रीति से छाया से दिन का इष्ट जानना— परस दिन जो २१ जूत को होता है। पहिले बता चुके हैं कि किस अक्षांश पर कितना परम दिन [ बड़े से बड़ा दिन ] होता है।

( १ ) (परसदिन—अपना दिनमान ) + ५ = ( अ ) = दिन मध्य छाया ( बड़ी पल में )।

अपना दिनमान ५६

( १२ अंगुल संकु की छाया )—( अ=दिन मध्य छाया ) + १२ अंगुल संकु=दिन की गत या मध्य घटी पल अर्थात दोपहर के पहिले इतना दिन चढ़ा या दोपहर के बाद का इष्ट है तो इतना दिन शेष रहू जानना।