सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदिनमान जानना : २१३
मिनट आगे वह तारा मध्यम रवि के आगे हैं ऐसा समझना। अर्थात् उतने बजे होंगे समझना। क्योंकि मध्यम रवि १२ बजे सिर पर आता है और इसके उतने घण्टा मि० आगे वह तारा है। इस कारण समझ लेना कि उतने बजे होंगे।
जैसे १ जनवरी को रात्रि में यह जानना है कि घड़ी में क्या बजा होगा। ५ जनवरी को दोपहर को मध्यम रवि का विषुवांश १९ घण्टा है। जैसा पहिले चक्र में दे चुके हैं अपने को १ जनवरी की रात्रि को जानना है। (ता० ५-१ ता०) = ४ अन्तर दिन। इसमें दोपहर रात तक ३ दिन घटाया तो = ३३ हुए। अर्थात् ४ दिन से आधा दिन इस कारण घटाया कि अपना समय ५ ता० के पहिले का है। ३३ दिन X ४ मि० गति = ० ० १४ मि० ता० ५ को १९ घण्टा विषुवांश था। इसमें से ०-१४ मि० घटा दिये तो शेष १८ घण्टा ४६ मि० बचे—यह उस दिन का नाक्षत्र काल था मध्यम रवि का विषुवांश हुआ।
मान लो उस दिन सिर पर अश्विनी नक्षत्र है। अश्विनी का विषुवांश चक्र में १ घण्टा ४९ मि० दिया है। इसमें से नाक्षत्र काल १८ घं० ४६ मि० घटाया तो नहीं
| घं० मि० | घटता, २४ घण्टा जोड़ कर घटाया तो शेष ७ घं० ३ मि० |
|---|---|
| १-४९ | रहे। अर्थात् १२ बजे दोपहर को जब मध्यम रवि मध्याह्न पर |
| —१८—४६ | था उससे ७ घं० ३ मि० आगे यह तारा है अर्थात् ७ घं० ३ मि० |
| शेष ७—३ | रात के बजे हैं। |
समय देखते समय सिर के ऊपर कोई पहचान का तारा न मिले तो कुछ समय ठहरो, जब कोई पहचान का तारा सिर पर आवे तो उससे गणित कर अपनी घड़ी मिला लो।
ऊपर के उदाहरण में नाक्षत्रकाल १८—४६ आया है। यदि इससे १ घण्टा कम या अधिक जिस तारा का नाक्षत्र काल हो अर्थात् १७-४६ या १९-४६ हो तो वह तारा इस रात को बिलकुल नहीं दिखेगा। जैसे १ जनवरी को पूर्वाषाढा उत्तराषाढा और श्रवण नहीं दिखेंगे, क्योंकि जनवरी में मकर संक्रान्ति होती है तो धन और मकर के नक्षत्र नहीं दिखेंगे। जिस तारे का विषुवांश इससे ६ घण्टा आगे हो अर्थात् (१८-४६)+६=२० घण्टा ४६ मि० हो तो वह तारा सूर्यास्त के समय ६ घण्टा आगे होगा जैसे उ० भाद्रपद नक्षत्र, उससे १२ घण्टा अधिक हो (०-४६)+१२-४६ तो विषुवांश का तारा रात्रि को कभी सिर पर आवेगा जैसे हस्त।
तारों का होरात्मक विषुवांश
इनमें स्थिति के अनुसार बहुत थोड़ा अन्तर पड़ता है, क्योंकि प्रतिवर्ष इनकी गति ३-४ सेकण्ड के लगभग है।