सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२१२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
तारा देखकर रात्रिमान जानना
(१) सूर्य नक्षत्र से, सिर के ऊपर जो नक्षत्र हो उस तक गिनो, गिनने से जो संख्या आवे उसमें ७ घटा कर २० का गुणा करना और ९ का भाग देना तो जो अंक शेष रहे वह गत रात्रि स्पष्ट होगी।
(२) या सूर्य नक्षत्र से, सिर के ऊपर जो नक्षत्र हो उस तक गिनने में जो संख्या आवे उसमें ७ घटाकर २ का गुणा कर २ घटा दो तो रात्रि स्पष्ट होगी।
पूर्वाषाढ़ा, अनुराधा, ज्येष्ठा, आश्लेषा, रेवती और विशाखा सिर के ऊपर हों तो अष्टम में उदय होता है। मृगशिर और मूल नक्षत्र में हो तो नवम में उदय होता है और जब कोई नक्षत्र सिर के ऊपर हो तो अष्टम में उदय होता है। सूर्य नक्षत्र जो होता है वह सूर्योदय के साथ उदय होता है और सूर्य अस्त के समय वही नक्षत्र अस्त स्थान पर आ जाता है। इस कारण सूर्य नक्षत्र से सिर के ऊपर तक जो नक्षत्र हों उनको यहाँ गिनना बताया है और सिर के नक्षत्र से पूर्व की ओर गिनो तो ऊपर बताये अनुसार अष्टम या नवम नक्षत्र उदय स्थान में रहेगा।
मान लो सूर्य मूल नक्षत्र पर है और रात्रि को देखा अश्विनी नक्षत्र सिर पर है। मूल से अश्विनी तक गिना तो १० नक्षत्र हुए। इनमें ७ घटा कर २० का गुणा कर ९ का भाग दिया।
(१०—६) X २० ÷ ९ = (२ X २०) ÷ ९ = ६० ÷ ९ = ६ \frac{३}{९} = ६ बड़ी ४० पल इतनी रात्रि गत हुई ऐसा जानना।
दिनमान में गत रात्रि जोड़ने से उस समय का इष्ट काल होगा, जैसे उस दिन २६-४ दिनमान में ६-४० गत रात्रि जोड़ा तो ३२-४४ इष्ट काल हुआ।
दूसरी रीति से सूर्य नक्षत्र से सिर के ऊपर का नक्षत्र अश्विनी तक १० हुए। इसमें ७ घटाये ३ बचे, २ से गुणा किया=६ हुए। इसमें से २ घटाये ४ बड़ी रहे। इस रीति से कुछ अन्तर पड़ जाता है।
सिर पर नक्षत्र अश्विनी है इससे आठवां नक्षत्र पुष्य हुआ। इस कारण इस समय पुष्य नक्षत्र या कर्क रात्रि उदय हो रही है अर्थात् कर्क लगन होगी।
रात्रि का समय जानना
पहिले देखो सिर पर कौन तारा है और उस तारे का क्या विपुर्बांध है। नाक्षत्र काल से १ घण्टा कम या अधिक जिस तारे का विपुर्बांध है वह तारा उस रात्रि को विलकुल नहीं दिखाएगा। जिस तारे का विपुर्बांध ६ घण्टा अधिक हो वह तारा सूर्य अस्त होने के समय सूर्य के ६ घण्टा आगे होने से सिर पर उस समय होगा। उससे अधिक १२ घण्टा विपुर्बांध जिस तारे का है वह रात्रि को और कभी सिर पर आयेगा।
जो तारा सिर पर दिखे उसका विपुर्बांध आगे दिए हुए चक्र में से देख कर लिख लो। उसमें से उस दिन का नाक्षत्र काल घटा दो। जो घण्टा मिनट बचे उतने घण्टा