सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
पंक्ति सूर्य मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु केतु ५-१४° ४-२१° ५-८° १०-५° ६-२३° १११४° ७-०°-२५' १-०°-२६'
अब पंचाङ्क में देखो कि पंक्ति से इष्ट काल तक कोई ग्रहों में परिवर्तन हुआ है क्या? अष्टमी के आगे नवमी के इष्ट काल तक पंचाङ्क में इन ग्रहों में कोई परिवर्तन नहीं दिया, इस कारण इसीके अनुसार अपनी कुण्डली में ग्रह स्थापित करेंगे।
सूर्य ५-४° है अर्थात् कन्या का है, मंगल-सिंह का, बुध-कन्या का, गुरु कुम्भ का, शुक्र तुला का शनि मीन का राहु वृश्चिक का, केतु वृष का है। इसी प्रकार कुण्डली में जहाँ इन राशियों के अंक हैं वहाँ ये ग्रह स्थापित करेंगे।
लग्नकुंडली
चन्द्रकुंडली
राशि पहिले ही जान चुके हैं धन राशि है अर्थात् धन राशि का चन्द्र है, इस कारण चन्द्र को धन राशि पर रखा। लग्न को बीच में लग्न स्थान पर रखकर जो कुण्डली बनाई जाती है वह लग्न कुण्डली है और चन्द्र राशि को बीच में (लग्न स्थान पर) रख कर जो कुंडली बनाई जाती है वह चन्द्र कुंडली है।