भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३३४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

कुण्डली क्रम ( ७ )

ये जितनी कुण्डलियाँ बनाई गई हैं, सब एक ही प्रकार की हैं, परन्तु उनके आकार भिन्न-भिन्न प्रकार के बनाये गये हैं। ज्योतिषी लोग शोभा के लिए इसी प्रकार की अनेक रूप की सुन्दर कुंडलियाँ जन्मपत्री में बनाते हैं। उनमें रंग भी भर देते हैं।

इन सब कुंडलियों में क्रम एक ही प्रकार का है। अर्थात् ऊपर लगने से आरम्भ कर बाईं ओर से क्रमानुसार राशियाँ स्थापित की जाती हैं। परन्तु इस प्रकार की कुंडली में इनके भाव स्थिर हैं केवल राशियाँ चलायमान हैं। देखो लग्नकुण्डली क्रम १ से ७ तक।

परन्तु भारतवर्ष में इन कुण्डलियों के आकार के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न प्रकार से कुण्डलियाँ कई स्थानों में बनाई जाती हैं और उनके बनाने की पद्धति भी भिन्न-भिन्न हैं। इस कारण उनका वर्णन कर देना यहाँ आवश्यक है जिससे इस प्रकार की कोई कुण्डली मिलने पर तवीन विद्यार्थी को समझने में कोई अडचन न हो।

राशि कुण्डली क्रम ( ८ )

ग्रह कुण्डली क्रम ( ९ )