भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 277, कुल 288 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 277

व्यासाघन : २५९

संकेतअक्षरआ०चं०कु०रा०जी०शा०तु०के०मु०
वर्ष१०१८१६१९१७२०
चंद्र नक्षत्रकृतिकारोहिणीमृग.आर्द्रापुन.पुष्यआश्ले.मघाप्रू. फा.
उ. फा.हस्तचित्रास्वातीविशा.अनु.ज्ये.मूल.प्रू. धा.
उ. धा.श्रवणधनि.शत.पू.शा.उ.भा.रेवतीअश्वि.भरणी.

ग्रहों का क्रम ऊपर दिये संकेताक्षर से पंडित लोग स्मरण रखते हैं।

ग्रह की दशा निकालना—

कृतिका नक्षत्र से अपने जन्म नक्षत्र तक गिनने में जो संख्या आवे उसमें ९ का भाग दो। जो शेष बचे आ० चं० कु० रा० जी० शा० तु० के० मु० इस प्रकार क्रम पूर्वक गिनो जो ग्रह आवे उस ग्रह की महादशा में जन्म हुआ ऐसा जानना।

जैसे आर्द्रा नक्षत्र में जन्म हुआ है तो कृतिका से आर्द्रा तक गिना ४ संख्या हुई। यह संख्या ९ से अधिक होती तो ९ का भाग देते, शेष ४ ही रहा। आ० १ चं० २ कु० ३ रा० ४ गिनने से चौथी राहु की महादशा आई।

ऊपर चक्र दिया है, उसमें गिनने की आवश्यकता नहीं है। जन्म नक्षत्र आर्द्रा के ऊपर क्रम का ४ दिया है, नीचे राहुलिखा है और नीचे १८ वर्ष लिखे हैं। इससे प्रगट हुआ कि राहु की महादशा में जन्म हुआ है और यह महादशा १८ वर्ष रहती है। आर्द्रा नक्षत्र कुछ भुक्त हो चुका होगा उसी अनुपात से राहु के वर्ष भी भुक्त हो गये होंगे। जन्म नक्षत्र कितना भुक्त हो चुका है और कितना भोगने को शेष है और पूरा नक्षत्र कितने घड़ी पल्ल का है जान कर उसी अनुपात से दशा के भुक्त वर्ष निकाले जाते हैं।

( भयात X महादशा वर्ष ) ÷ भभोग=भुक्त वर्ष मास दिन आदि।

( महादशा वर्ष—भुक्त वर्ष ) = भोग्य वर्ष महादशा के ( गणित आगे दिया है )

अंतर्दशा

महादशा का समय बहुत बड़ा रहता है। उससे सूक्ष्म समय निकालने को अंतर्दशा निकालनी पड़ती है। अंतर्दशा से भी सूक्ष्म समय प्रत्यंतर दशा में और उससे भी सूक्ष्म समय विदशा साधन करने से निकलता है। यह सब गणित खंड में दिया है। यहां केवल अंतर्दशा निकालना बतलाते हैं।

जिस ग्रह की महादशा में अंतर्दशा निकालनी हो तो पहिले उस ग्रह की अंतर्दशा होगी जिसकी महादशा है। उसके उपरान्त उसके आगे क्रमानुसार जो ग्रह चक्र में दिये हैं उनकी अंतर्दशा होगी।

अंतर्दशा के ग्रहों के वर्ष निकालने के लिये अंतर्दशा में जो ग्रह पड़ा है उस के वर्ष और महादशा के वर्ष की संख्या गुणा कर=३० १० का भाग दो तो अंतर्दशा के मास दिन आदि की संख्या निकल आयेगी। १२ मास से अधिक हो तो १२ का भाग देकर वर्ष बना लो। १० का भाग देने से जो बच रहे उसमें ३ का गुणा कर देने से