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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२५८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

अध्याय ४६

दशासाधन

ग्रहों का जो फल होता है उस फल की प्राप्ति का समय जानने को दशा साधन करना पड़ता है ।

दशा कई प्रकार की हैं परन्तु उनमें साधारण प्रकार से मुख्य ३ दशाएँ उपयोग में आती हैं । इतर दशाओं के साधन में कुछ गणित करना पड़ता है और कहीं कहीं अधिक गणित करना पड़ता है, इस कारण उनको यहाँ छोड़ देते हैं । गणित खंड में उनका वर्णन होगा ।

३ प्रकार की दशा ।

( १ ) विशोत्तरी दशा ( २ ) अष्टोत्तरी दशा ( ३ ) योगिनी दशा ।

जन्म पत्रिका में प्रायः विशोत्तरी या अष्टोत्तरी दशा निकाली जाती है । विशोत्तरी दशा में परम आयु १२० वर्ष की और अष्टोत्तरी दशा में १०८ वर्ष की मान कर दशा साधन की जाती है ।

इन दशाओं का फल जानने के लिये जैसा ग्रह का फल होगा वैसा फल उसकी दशा में होगा । उन ग्रहों के विषय में गुण दोष अच्छी तरह जान लेना चाहिये ।

विशोत्तरी या अष्टोत्तरी दशा में से एक कोई दशा का साधन करना चाहिये । यदि शुक्ल पक्ष में रात्रि समय जन्म हो तो विशोत्तरी दशा और कृष्णपक्ष में दिन का जन्म हो तो अष्टोत्तरी दशा लेनी चाहिये ।

शुक्ल पक्ष में दिन के समय या कृष्ण पक्ष में रात्रि के समय जन्म हो तो योगिनी दशा साधन करना चाहिये । परन्तु बहुधा ज्योतिषी लोग विशोत्तरी और योगिनीदशा दोनों साधन करते हैं । अष्टोत्तरी दशा अधिकतर दक्षिण तथा गुजरात में प्रचलित है । मुख्य दशा होने के कारण यहाँ केवल विशोत्तरी दशा निकालना बतलाते हैं ।

विशोत्तरी दशा साधन

विशोत्तरी दशा में परम आयु १२० वर्ष की मानी गई है । जिस नक्षत्र में अपना जन्म हुआ हो उस नक्षत्र के विचार से ग्रह की आरम्भ दशा निकाली जाती है ।

इस दशा में ग्रहों की दशा का क्रम और वर्ष एवम् उनके नक्षत्र नीचे चक्र में बताये गये हैं । कृत्तिका को आदि नक्षत्र मान कर एक एक नक्षत्र में एक एक ग्रह योगता है । इस प्रकार ९ ग्रह २७ नक्षत्र भोगने से प्रत्येक ग्रह को ३-३ नक्षत्र मिलते हैं ।

विशोत्तरी महादशा चक्र

क्रम
ग्रहआदित्यचंद्रशुक्रराहुबीजशनिबुधकेतुशुक्र
(सूर्य)(मंगल)(गुरु)