सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
करता है और चन्द्रमा सहित पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इस प्रकार पृथ्वी की परिक्रमा की परिधि को चन्द्र अपनी परिक्रमा में दो जगह काटता है। अर्थात् पृथ्वी और चन्द्र की परिक्रमा की परिधि एक दूसरे को दो जगह काटती है, उनमें से एक बिन्दु को राहु कहते हैं जो नीचे से ऊपर की ओर जाने वाला बिन्दु है। और दूसरे बिन्दु को जो उसके ठीक विपक्ष है, केतु कहते हैं। यह ऊपर से नीचे जाने वाला बिन्दु है इसीसे राहु को Ascending Node (असेन्डिंग नोड) और केतु को Descending Node (डिसेन्डिंग नोड) भी कहते हैं।
ये दोनों ग्रह बिन्दु मात्र हैं। एक दूसरे से सदा ६ राशि के अन्तर पर रहते हैं और सदा दूसरे ग्रहों की दिशा से विरुद्ध क्रम से चलते हैं। जब चन्द्रमा पूर्णमासी के समय या सूर्य अमावस्या के समय इन्हीं पातों के पास पहुँचता है तो चन्द्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण होता है। इस कारण राहु और केतु को भी ग्रह माना गया है।
जिस प्रकार चन्द्र और सूर्य ग्रहण के समय संसार के वातावरण में विचित्र प्रभाव
चित्र संख्या ४—राहु केतु की स्थिति
होता है इसी प्रकार राहु केतु की स्थिति के कारण भी अनुष्ठ पर प्रभाव पड़ता है। चित्र संख्या ४ से राहु केतु की स्थिति समझ में आवेगी।
पृथ्वी का प्रमण-मार्ग ही सूर्य का प्रमण-मार्ग कहा जाता है। इसे ही क्रान्ति वृत्त कहते हैं। इसी प्रकार चन्द्र पृथ्वी की परिक्रमा करते समय क्रान्ति वृत्त को २ स्थानों में काटता है जो चित्र संख्या ४ में तीर की नोक से बताये गये हैं इन्हीं स्थानों को चन्द्र के पात भी कहते हैं।
देखें चित्र संख्या ४। चन्द्रमा अ बिन्दु में पहुँचकर आ होते हुए अ बिन्दु पर जाता है इसलिए इस बदाव के बिन्दु अ को उत्तर पात या राहु कहते हैं। चन्द्रमा