सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसीर जगत् और ग्रह : ११
व बिन्दु से बा होते हुए अ बिन्दु पर जाता है इस व बिन्दु को दक्षिण पात या केतु कहते हैं।
चित्र संख्या ५
राशिचक्र और ग्रहों के घूमने की दिशा सूचक चित्र, इसमें पृथ्वी के आस-पास ग्रह घूमते हुए बताये हैं।
चन्द्रमा जिस मार्ग में परिक्रमा करता है उसे चन्द्रकक्षा कहते हैं। चन्द्रकक्षा क्रान्ति वृत्त को लगभग ५ अंश कोण बनाये हुए काटती है। अर्थात् जहाँ चन्द्र का मार्ग पृथ्वी के मार्ग को काटता है वहाँ लगभग ५ अंश का कोण बनता है इसी कोण को चन्द्र का विशेषण कहते हैं। विशेषण = शर = Celestial Latitue
सूर्य स्थिर है
सूर्य बाकाय में पूर्व दिशा में उदय होता है और पश्चिम में अस्त होते दिखता है, परन्तु वास्तव में सूर्य स्थिर है। पृथ्वी इतर ग्रहों के सदृश पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है इस कारण पृथ्वी लोक के रहने वालों को सूर्य प्रमण करता हुआ