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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१२ : सचित्र ज्योतिष विद्या, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

दिखता है। परन्तु ज्योतिष शास्त्र में गणित की सुविधा के लिए पृथ्वी को स्थिर मान कर सूर्य को चलित माना है। चाहे सूर्य को या पृथ्वी को स्थिर मानें परन्तु उनकी स्थिति में कोई अन्तर नहीं पड़ता। सूर्य को चलित मान लेने में गणित में बहुत सरलता प्रतीत होती है। इसी कारण सूर्य को चलित माना है परन्तु वास्तव में सूर्य स्थिर है इसका ध्यान रहे।

पृथ्वी ग्रह के स्थान में सूर्य ग्रह मानकर जो सूर्य का गणित किया जाता है वह पृथ्वी का ही गणित है। पीछे चित्र क्रम संख्या ५ में पृथ्वी को केन्द्र मानकर सूर्य आदि ग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए बताये गए हैं।

राशि-चक्र पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है जिससे पहिले भेष फिर वृष इत्यादि क्रमानुसार राशियाँ आकाश में उदय होती दिखाई देती हैं। परन्तु ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर घूमते हैं जैसा चित्र संख्या ५ में तीर द्वारा समझाया गया है।

इस राशि-चक्र में प्रत्येक राशियों के अंश भी बताये गए हैं जिनमें २ अंश का एक छोटा घर है। सब नक्षत्र और राशियाँ पूर्व (लम्ब = उदय स्थान) से शिरोबिन्दु (आकाश = क्षय स्थान) की ओर जाते दिखते हैं। और शिरोबिन्दु से पूर्व ( लम्ब ) की ओर चलते हैं।

अध्याय ४

राशिचक्र Zodiac

आकाश में सूर्य जिस मार्ग से भ्रमण करते हुए दिखता है उसे क्रान्तिवृत्त Ecliptic कहते हैं। इसे आपामंडल या क्रांतिमंडल भी कहते हैं। देखें चित्र संख्या ६। सब ही ग्रह इसी मार्ग से या इसके समीप होकर सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसे रवि का मार्ग भी कहते हैं क्योंकि सूर्य एक वर्ष में १२ राशियों में प्रायः इसी मार्ग से एक बार परिक्रमा कर लेता है। क्रान्तिवृत्त वास्तव में पृथ्वी का परिक्रमा करने का मार्ग है और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा एक वर्ष में प्रायः १२ राशियों में कर लेती है। परन्तु साधारण प्रकार से यही कहा जाता है कि सूर्य क्रांतिवृत्त की १२ राशियों में एक वर्ष में परिक्रमा कर लेता है, इस बात का ध्यान रहे। यह क्रांतिवृत्त अंडाकार है। देखें चित्र संख्या ७

भचक्र या राशिचक्र—यह क्रान्तिवृत्त के उत्तर दक्षिण ९-९° की चौड़ाई का एक कल्पित पट्टा माना जाता है। इसे भचक्र या राशिचक्र कहते हैं, क्योंकि सब ही ग्रह इस कल्पित पट्टे के भीतर क्रांतिवृत्त पर या उसके उत्तर या दक्षिण होकर घूमा