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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२६४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

अन्तर्दशा चक्र

जन्म समयसम्बत् सूर्य राशि, अंश
१९९५—५—१५
+ शनि की अन्तर्दशा१—५—८
तक शनि=१९९६—१०—२३
+ बुध की२—१०—०
तक बुध=१९९९—८—२३
+ केतु१—२—०
तक केतु=२०००—१०—२३

इस प्रकार शुक्र की महादशा में अन्तर्दशा वर्ण हुए ।

अंश जोड़ते समय ३० अंश से अधिक होने पर राशि में एक बढ़ा दो और राशि जोड़ते समय १२ से अधिक हो तो वर्ण में एक बढ़ा देना ।

इस प्रकार जोड़ कर महादशा या अन्तर्दशा का समय निकाल लेना । अब इन सबको इस प्रकार चक्र बनाकर लिखेंगे ।

साधन किया हुआ महादशा चक्र

शुक्र की अन्तर्दशा का चक्र

सूर्य की

सूर्य की

ग्रहवर्णमासदिनसम्बत्रा.अंशग्रहवर्णमासदि.सम्बत्रा.अंश
१९९५१५ जन्म१९९५१५ जन्म
शुक्र२०००१०२३ तकशनि१९९६१०२३ तक
सूर्य२००६१०२३ ,,बुध१०१९९९२३ ,,
चन्द्र१०२००६११२३ ,,केतु२०००१०२३ ,,
मं.२०२३१०३ ,,
राहु१८२०४११०२३ ,,
गुध१६२०५७१०२३ ,,
शनि१९२०७६१०२३ ,,
बुध१७२०९३१०२३ ,,
केतु*२१००१०२३ ,,

इसके आगे सूर्य की अन्तर्दशा के वर्ण इसमें जोड़ते जाओ तो सूर्य की अन्तर्दशा का चक्र बन जायगा । आगे चन्द्र, मंगल, राहु आदि की अन्तर्दशा इसी प्रकार निकाल लो । चक्र से प्रगट होगा कि इतने सम्बत् में जब सूर्य उतने राशि अंश पर आयेगा तब तक वह दशा रहेगी । जैसे शुक्र महादशा सम्बत् २००० में सूर्य जब १० राशि २३ अंश पर आयगा उस समय तक रहेगी । इसी प्रकार और भी ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा के विषय में समझना ।