सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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अन्तर्दशा चक्र
| जन्म समय | सम्बत् सूर्य राशि, अंश |
|---|---|
| १९९५—५—१५ | |
| + शनि की अन्तर्दशा | १—५—८ |
| तक शनि= | १९९६—१०—२३ |
| + बुध की | २—१०—० |
| तक बुध= | १९९९—८—२३ |
| + केतु | १—२—० |
| तक केतु= | २०००—१०—२३ |
इस प्रकार शुक्र की महादशा में अन्तर्दशा वर्ण हुए ।
अंश जोड़ते समय ३० अंश से अधिक होने पर राशि में एक बढ़ा दो और राशि जोड़ते समय १२ से अधिक हो तो वर्ण में एक बढ़ा देना ।
इस प्रकार जोड़ कर महादशा या अन्तर्दशा का समय निकाल लेना । अब इन सबको इस प्रकार चक्र बनाकर लिखेंगे ।
साधन किया हुआ महादशा चक्र
शुक्र की अन्तर्दशा का चक्र
सूर्य की
सूर्य की
| ग्रह | वर्ण | मास | दिन | सम्बत् | रा. | अंश | ग्रह | वर्ण | मास | दि. | सम्बत् | रा. | अंश |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १९९५ | ५ | १५ जन्म | १९९५ | ५ | १५ जन्म | ||||||||
| शुक्र | ५ | ५ | ८ | २००० | १० | २३ तक | शनि | १ | ५ | ८ | १९९६ | १० | २३ तक |
| सूर्य | ६ | ० | ० | २००६ | १० | २३ ,, | बुध | २ | १० | ० | १९९९ | ८ | २३ ,, |
| चन्द्र | १० | ० | ० | २००६ | ११ | २३ ,, | केतु | १ | २ | ० | २००० | १० | २३ ,, |
| मं. | ७ | ० | ० | २०२३ | १० | ३ ,, | |||||||
| राहु | १८ | ० | ० | २०४१ | १० | २३ ,, | |||||||
| गुध | १६ | ० | ० | २०५७ | १० | २३ ,, | |||||||
| शनि | १९ | ० | ० | २०७६ | १० | २३ ,, | |||||||
| बुध | १७ | ० | ० | २०९३ | १० | २३ ,, | |||||||
| केतु | ७ | ० | * | २१०० | १० | २३ ,, |
इसके आगे सूर्य की अन्तर्दशा के वर्ण इसमें जोड़ते जाओ तो सूर्य की अन्तर्दशा का चक्र बन जायगा । आगे चन्द्र, मंगल, राहु आदि की अन्तर्दशा इसी प्रकार निकाल लो । चक्र से प्रगट होगा कि इतने सम्बत् में जब सूर्य उतने राशि अंश पर आयेगा तब तक वह दशा रहेगी । जैसे शुक्र महादशा सम्बत् २००० में सूर्य जब १० राशि २३ अंश पर आयगा उस समय तक रहेगी । इसी प्रकार और भी ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा के विषय में समझना ।