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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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कार्य सिद्ध योग : २६५

सूर्य की कौन राशि किस चान्द्र मास में पड़ती है पहिले बता चुके हैं, उसके अनुसार उस सम्बन्ध का मास जान सकते हो। मोटे हिसाब से सूर्य १ दिन में १ अंश चलता है। इस हिसाब से जितने अंश हों उतने दिन जान लो। यदि पंचांग पास हो तो पंचांग देख कर उस समय की तारीख निकाल लो, जिससे प्रगट हो कि किस तारीख से किस तारीख तक कौन ग्रह की दशा रहेगी। जैसे कन्या राशि का सूर्य है तो कुत्तार में कन्या राशि आती है। इसी प्रकार समय का अनुमान कर लेना।

अध्याय ५०

कार्य सिद्ध योग

जब यह जानना है कि कोई विशेष कार्य सिद्ध होगा या नहीं, तो उस समय घड़ी देखकर लगन निकाल कर उस समय के ग्रह पंचांग से देखकर कुंडली बना लो। यही प्रश्न कुण्डली हुई। इसी पर से किसी प्रश्न का विचार करना पड़ता है। जिस प्रश्न का विचार करना हो वह प्रश्न किस भाव से सम्बन्ध रखता है, खोजो। जैसे किसी ने स्त्री सम्बन्ध का प्रश्न किया तो यह सप्तम भाव से सम्बन्ध रखता है, इस कारण सप्तम भाव कार्य स्थान कहलाया। कार्य भाव का स्वामी कार्यश कहलाता है। मान लो सप्तम स्थान में वृष राशि है तो वृष का स्वामी शुक्र होता है। इस कारण कार्यश यहाँ शुक्र हुआ। फिर लग्नेश कार्यश और उनकी दृष्टि आदि सम्बन्ध से निम्न रीति से प्रश्न का विचार करो।

( १ ) लग्नेश, कार्यश लगन में हो।

( २ ) लग्नेश कार्यश दोनों कार्य स्थान में हों।

( ३ ) लग्नेश कार्य स्थान में हो और कार्यश लगन स्थान में हो।

( ४ ) किसी स्थान में लग्नेश, कार्यश साथ हों।

( ५ ) लग्नेश लगन में कार्यश कार्य स्थान में हो।

( ६ ) लग्नेश कार्यश कहीं हों परन्तु उनकी दृष्टि हो।

( ७ ) लग्नेश कार्यश अपने अपने उच्च या स्वगृह के हों।

इतने से किसी योग के होने पर कार्य सिद्ध होगा और इतने से कोई योग न हो तो कार्य सिद्ध नहीं होगा।