भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२६६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

कार्य सिद्धि समय

( १ ) चन्द्र की दृष्टि और योग से जो समय आवे उस समय में या अब लनेया या कार्यश का मिलाप हो पंचांग देख कर समय का विचार करना ।

( २ ) प्रश्न काल में जो लग्न हो और वर्तमान में जो लग्न का उदित नवांश हो और उसका जो ग्रह नवांश स्वामी हो उनके अनुसार समय की अवधि जानना ।

ग्रहरविचन्द्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनि
अवधिअयनक्षणदिनऋतुनासपक्षवर्ष

( ६ मास )

कार्य सिद्ध कितने मास अयन क्षण या कितने दिन में होगा जानने को लग्न के उदित अंश देखना, जितने अंश पर हो, उतनी ही संख्या कहना ।

अध्याय ५१

नवांश ज्ञान

किसी राशि के ९ सम विभाग करो तो एक विभाग को नवांश कहते हैं । ३००० = ३०—२००० का १ नवांश हुआ । किसी राशि के आरम्भ होने से अन्त होने तक, इस प्रकार ९ नवांश पूरे हो जाते हैं ।

अब यह जानने को कि किस राशि में पहिले कौन नवांश उदय होता है, राशियों की दिशाओं पर ध्यान दो । जिस राशि की जो दिशा है उसका जो भाव है स्मरण रखो तो राशि के आरम्भ नवांश का पता लग जायगा ।

( १ ) यहाँ लग्न की दिशा पूर्व है जिसकी राशियाँ १, ५, ९ हैं तो लग्नभाव १ होने से इन राशियों का नवांश मेघ से आरम्भ होगा ।

( २ ) उसके बाद दशम की दिशा दक्षिण है जिसकी राशियाँ २, ६, १० हैं, तो ये राशियाँ दशम भाव १० की होने से, इनमें १० राशि का नवांश पहिले उदय होगा ।

( ३ ) इसके बाद सप्तम की पश्चिम दिशा की राशियाँ ३, ७, ११ हैं तो ये राशियाँ सप्तम भाव ७ की होने से ७ राशि से इनका नवांश आरम्भ होगा ।