भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

१६विशाखाAlpha Libraeअल्फा लिब्राईझवावि.
१७अनुराधाDelta Scorpiiडेल्टा स्कारपीअकलीअनु.
१८ज्येष्ठाAntaresअंटारेसकलबज्ये.
१९मूलLambda Scorpiiलामडा स्कार्पीसोलामू.
२०पूर्वाषाढाDelta Sagittariiडेल्टा सागिट्टारीनवापूषा.
२१उत्तराषाढाPhi Sagittariफी सागिट्टारीवरुवाउषा.
२१अअभिजित्Vegaव्हेगाझावेअभि.
२२अवणAltairआल्टायरवलाअ.
२३धनिष्ठाAlpha Delphiniअल्फा डेल्फिनीसोळवध.
२४शतभिषक्Lambda Aquariiलामडा अक्वेरीअखवाश.
२५पूर्वाभाद्रपदMarkabमर्काबमुकड़पूषा.
२६उत्तराभाद्रपदAlgenibअल्गेनिबमुगखउषा.
२७रेवतीZeta Pisciumझीटा पीशियमरिशारे.

२७ नक्षत्रों में अभिजित् नक्षत्र ( २१ अ ) की गणना नहीं होती। क्योंकि यह नक्षत्र क्रान्ति प्रवेश के बाहर है। इसका उपयोग मुहूर्त विषय में होता है। यह नक्षत्र आकाश में उत्तराषाढा और अवण के बीच में कुछ दृष्ट कर है।

उत्तराषाढा नक्षत्र का चतुर्थ चरण अर्थात् अन्तिम चतुर्थ भाग और अवण नक्षत्र के आदि का एक भाग जो ४ घड़ी का है अर्थात् अवण नक्षत्र के आदि का पन्द्रहवाँ भाग इतना सब मिलकर अभिजित् नक्षत्र का भोग माना जाता है। अर्थात् इतना अभिजित् नक्षत्र होता है।

प्रत्येक राशि में २३ नक्षत्र=९ चरण होते हैं। प्रत्येक राशि में किस नक्षत्र का कौन-कौन चरण आता है नीचे के चक्र से समझ में आ जायेगा।

क्रमराशिनक्षत्रचरणक्रमराशिनक्षत्रचरण
मेष ( १ )अश्विनी
( २ )भरणी
( ३ )कृतिका००( ११ )पू. फा.
वृष ( ३ )कृतिका
( ४ )रोहिणी
( ५ )मृगशिर००( १३ )हस्त
मिथुन ( ५ )मृगशिर००( १४ )
( ६ )आर्द्रा
( ७ )पुनर्वसु( १५ )
कर्क ( ७ )पुनर्वसु०००( १६ )विशाखा
( ८ )पुष्य