सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 38, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
| १६ | विशाखा | Alpha Librae | अल्फा लिब्राई | झवा | वि. |
|---|---|---|---|---|---|
| १७ | अनुराधा | Delta Scorpii | डेल्टा स्कारपी | अकली | अनु. |
| १८ | ज्येष्ठा | Antares | अंटारेस | कलब | ज्ये. |
| १९ | मूल | Lambda Scorpii | लामडा स्कार्पी | सोला | मू. |
| २० | पूर्वाषाढा | Delta Sagittarii | डेल्टा सागिट्टारी | नवा | पूषा. |
| २१ | उत्तराषाढा | Phi Sagittari | फी सागिट्टारी | वरुवा | उषा. |
| २१अ | अभिजित् | Vega | व्हेगा | झावे | अभि. |
| २२ | अवण | Altair | आल्टायर | वला | अ. |
| २३ | धनिष्ठा | Alpha Delphini | अल्फा डेल्फिनी | सोळव | ध. |
| २४ | शतभिषक् | Lambda Aquarii | लामडा अक्वेरी | अखवा | श. |
| २५ | पूर्वाभाद्रपद | Markab | मर्काब | मुकड़ | पूषा. |
| २६ | उत्तराभाद्रपद | Algenib | अल्गेनिब | मुगख | उषा. |
| २७ | रेवती | Zeta Piscium | झीटा पीशियम | रिशा | रे. |
२७ नक्षत्रों में अभिजित् नक्षत्र ( २१ अ ) की गणना नहीं होती। क्योंकि यह नक्षत्र क्रान्ति प्रवेश के बाहर है। इसका उपयोग मुहूर्त विषय में होता है। यह नक्षत्र आकाश में उत्तराषाढा और अवण के बीच में कुछ दृष्ट कर है।
उत्तराषाढा नक्षत्र का चतुर्थ चरण अर्थात् अन्तिम चतुर्थ भाग और अवण नक्षत्र के आदि का एक भाग जो ४ घड़ी का है अर्थात् अवण नक्षत्र के आदि का पन्द्रहवाँ भाग इतना सब मिलकर अभिजित् नक्षत्र का भोग माना जाता है। अर्थात् इतना अभिजित् नक्षत्र होता है।
प्रत्येक राशि में २३ नक्षत्र=९ चरण होते हैं। प्रत्येक राशि में किस नक्षत्र का कौन-कौन चरण आता है नीचे के चक्र से समझ में आ जायेगा।
| क्रम | राशि | नक्षत्र | चरण | क्रम | राशि | नक्षत्र | चरण |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | मेष ( १ ) | अश्विनी | |||||
| ( २ ) | भरणी | ५ | |||||
| ( ३ ) | कृतिका | ०० | ( ११ ) | पू. फा. | |||
| २ | वृष ( ३ ) | कृतिका | ० | ||||
| ( ४ ) | रोहिणी | ६ | |||||
| ( ५ ) | मृगशिर | ०० | ( १३ ) | हस्त | |||
| ३ | मिथुन ( ५ ) | मृगशिर | ०० | ( १४ ) | |||
| ( ६ ) | आर्द्रा | ७ | |||||
| ( ७ ) | पुनर्वसु | ० | ( १५ ) | ||||
| ४ | कर्क ( ७ ) | पुनर्वसु | ००० | ( १६ ) | विशाखा | ||
| ( ८ ) | पुष्य | ८ |