सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
जब नक्षत्रों की पहिचान हो जावे तो ग्रहों की भी खोज करें। किसी पञ्चांग से प्रगट हो सकता है कि अमुक ग्रह अमुक नक्षत्र या राशि पर है। इनको समझ लेने से ज्योतिष शास्त्र की ओर बातें शीघ्र समझ में आने लगेंगी।
आकाश का नक्शा देखने का समय
तारागण प्रतिदिन पश्चिम को १° पीछे हटते हैं। जो तारा आज संध्या को ७ बजे सिर पर है वह कल ७ बजने को ४ मिनट शेष रहेंगे तब सिर पर आवेगा। अर्थात् ४ मिनट यहिले दिखेगा।
वृत्त में ३६०° होते हैं और २४ घण्टे में एक वृत्त का चक्कर पूरा होता है। अर्थात् एक दिन रात में सूर्य या नक्षत्र का पूरा एक चक्कर हो जाता है। इस प्रकार से १ घण्टे में १५° या ४ मिनट में १° नक्षत्र चलते हैं। इसी हिसाब से प्रति दिन नक्षत्रों की चाल में १° का अन्तर पड़ जाता है। अन्तर=१ दिन में=४ मिनट। १५ दिन=१ घण्टा। १ मास=२ घण्टा। ३ मास=६ घण्टा।
कारण यह है कि सावन मास से नक्षत्र दिन का मान २३ घण्टा ५६ मि० ४.०९०६ से० का है अर्थात् सावन दिन से नक्षत्र दिन लगभग ४ मिनट छोटा है। नक्षत्र उदय होने से अस्त होकर फिर दूसरे दिन उदय होने तक १ नक्षत्र दिन होता है। वह सूर्य के समय से ४ मिनट छोटा है अर्थात् सूर्य का विषुवांश प्रतिदिन ४ मिनट बढ़ता है।