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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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नक्षत्रों की पहिचान : ३१

क्रांति प्रदेश का वर्णन आगे मिलेगा ।

अश्विनी से १२ नक्षत्र तक सब तारे विषुवत्बृत्त के उत्तर में हैं और स्वाती अभिजित श्रवण धनिष्ठा पूरवाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद रेवती इनके तारे भी विषुवत् बृत्त के उत्तर में हैं । शेष तारे दक्षिण में हैं ।

चन्द्र का भ्रमण मार्ग—चन्द्रमा इस प्रकार नक्षत्रों में से होकर जाता है ।

१—इन १० नक्षत्रों के दक्षिण की ओर से चन्द्रमा जाता है । नक्षत्रों के नाम के आगे उनकी क्रम संख्या दी है ।

( १ ) अश्विनी १, ( २ ) भरणी २, ( ३ ) पुनर्वसु ७, ( ४ ) पू० फा० ११, ( ५ ) उ० फा० १२, ( ६ ) स्वाती १५, ( ७ ) श्रवण २२, ( ८ ) धनिष्ठा २३, ( ९ ) पू० भा० २५, ( १० ) उ० भा० २६ ।

२—इन ५ नक्षत्रों के उत्तर से चन्द्रमा जाता है ।

( १ ) मृग० ५, ( २ ) आर्द्रा ६, ( ३ ) आश्लेषा ९, ( ४ ) हस्त १३, ( ५ ) मूल १९ ।

३—शेष १२ नक्षत्रों के दोनों ओर से, कभी पास से कभी उन को डाकते हुए, चन्द्रमा जाता है ।

( १ ) कृतिका ३, ( २ ) रोहिणी ४, ( ३ ) पुष्य ८, ( ४ ) मघा १०, ( ५ ) चित्रा १४, ( ६ ) विशाखा १६, ( ७ ) अनुराधा १७, ( ८ ) ज्येष्ठा १८, ( ९ ) शतभिषक् २४, ( १० ) पू० वा० २०, ( ११ ) उ० वा० २१, ( १२ ) रेवती २७ ।

आकाश के नकशे को देखने की रीति

नकशे में जो दिखाएँ दी हैं उनके सम्बन्ध में कुछ प्रश्न हो सकता है । कारण यह है कि उत्तर के उपरान्त बाईं ओर पूर्व फिर दक्षिण फिर पश्चिम दिया है । पूर्व के स्थान में पश्चिम होने का कारण नीचे समझाया गया है ।

नकशे को आकाश से मिलान करने के लिये खुले मैदान में बैठें जहाँ से आकाश अच्छी तरह दिखे । मुँह ऊपर की ओर कर आकाश को देखें फिर नकशे को लोटाकर सिर के ऊपर रखें जिससे नकशे की पीठ आकाश की ओर रहे और नकशा पढ़ने में आ सके । नकशे में उत्तर दिया है वह उत्तर ध्रुव की ओर करे और नकशे के पूर्व को पूर्व की ओर रखें तो नकशे की शेष दिखाएँ ठीक स्थिति पर आ जायेंगी । इसके उपरान्त तारा देखने का जो समय बताया है उन्हीं यहीनों की उन्हीं तारीखों को जैसा आगे बताया है उस नकशे के अनुसार ताराओं को खोजें तो अवश्य मिलेगा ।

इसी प्रकार आकाश में देखते-देखते और पहिचानने का प्रयत्न करते रहने से मुख्य-मुख्य नक्षत्रों की अवश्य पहिचान होने लगेगी । जब आकाश खुला रहे और अंधेरी रात हो, तारा गणों का अवलोकन कर नक्षत्र पहिचानने का प्रयत्न करते हैं ।