सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
२५ पूर्व भाद्रपद } याममत्स्य और शतभिषक् के प्रकाशवान् तारा को सरल २६ उत्तर भाद्रपद } रेखा से मिलाओ और इस रेखा को उत्तर की ओर बढ़ाते जाओ तो इस रेखा के कुछ पश्चिम की ओर पूर्व भाद्रपद के २ तारे आते हैं। याममत्स्य से जितने अंश पर उत्तर में शतभिषक् है उतने ही अन्तर पर शतभिषक् से उत्तर में पूर्व भाद्रपद का १ तारा है और उसके बाजू ठीक उत्तर में १३° पर पूर्व भाद्रपद का दूसरा तारा है। ये दोनों तारे एक से तेजस्वी हैं। नवम्बर में व्यालू के समय सिर पर आते हैं इस समय शिरोबिन्दु के दक्षिण ५-६ अंश पर रहते हैं और दूसरा उतने पर ही उत्तर को रहता है। इन दोनों तारों के बीच जितना अन्तर है उससे भी अधिक अन्तर पर प्रत्येक के पूर्व में एक-एक तारा है इस प्रकार २ तारे हैं। इन दोनों को उत्तर भाद्रपद कहते हैं। इन दोनों में उत्तर का अधिक तेजस्वी है यह दूसरी श्रेणी का तारा है।
पूर्व भाद्रपद के २ तारे और उत्तर भाद्रपद के २ तारे मिलकर एक चौकोन सरीखा बनता है। देखें चित्र संख्या ३७। भाद्रपद मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा इस नक्षत्र के
चित्र संख्या ३७
२५ पूर्वा भाद्रपद, २६ उत्तरा भाद्रपद
चित्र संख्या ३८
२७ रेवती
समीप आता है। पूर्व भाद्रपद का आकार मच्छ सरीखा और उत्तर भाद्रपद का आकार यमल ( जोड़ा ) सरीखा बताया है।
२७ रेवती—इनमें ३२ तारे हैं। आकार मूदङ्ग सरीखा है और वैसा ही दिखता है। ये छोटे-छोटे तारे हैं। उत्तर भाद्रपद के दोनों तारों में से दक्षिण के तारे के आग्नेय कोण के लगभग १०-१० अंश पर तारों की १ कतार है जो पूर्व-पश्चिम गई है। इसमें ६-७ तारे तेजस्वी हैं और प्रायः एक दूसरे के समानांतर पर हैं। इनके दक्षिण में अग्वनी है। देखें चित्र संख्या ३८।
इन नक्षत्रों के अतिरिक्त आकाश गंगा याममत्स्य आदि चित्र में दिये हैं जिनको देखकर आकाश में पहिचानने का प्रयत्न करें।
आकाश गंगा Milk way
यह आकाश में उत्तर से दक्षिण की ओर तिरछी गई है। इससे बहुत से तारों का घना समुदाय होता है, जिसके कारण आकाश का वह भाग श्वेत सरीखा दिखता है जैसे बापल के टुकड़े छाये हों।