भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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३८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

चित्र संख्या ४८ तुला

चित्र संख्या ४९ वृश्चिक

चित्र संख्या ५० धन

चित्र संख्या ५१ मकर

चित्र संख्या ५२ कुंभ

चित्र संख्या ५३ मीन

अध्याय ६

पृथ्वी के अक्षांश और देशान्तर का स्पष्टीकरण

पृथ्वी के आकाश और देशान्तर का अधिक काम पड़ता है। इस कारण इनको समझ लेना चाहिए।

पृथ्वी नारंगी के सट्टा गोल है और दोनों सिरों पर चपटी है। पृथ्वी के इन दोनों सिरों को ध्रुव Pole कहते हैं। उत्तर के छोर को उत्तर ध्रुव और जो ठीक उमके विरुद्ध नीचे का छोर है उसे दक्षिण ध्रुव कहते हैं। दोनों ध्रुवों के बीचोंबीच एक कल्पित रेखा गई है उसे धुरी axle कहते हैं। दोनों ध्रुवों के बीचोंबीच एक समानान्तर दूरी पर जो एक कल्पित रेखा पूर्व-पश्चिम पृथ्वी की सतह पर से पृथ्वी को घेरते हुए गई है उसे विषुववृत्त या विषुवत् रेखा या भूमध्य रेखा Equator कहते हैं। इस रेखा से उत्तर या दक्षिण ध्रुव समानान्तर दूरी पर हैं। इसे भूमध्य रेखा कहते हैं।

अक्षांश Latitude

भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण को समानान्तर दूरी पर जो कल्पित रेखाएँ पृथ्वी की सतह पर पूर्व-पश्चिम बनाई गई हैं वे रेखाएँ अक्षांश कहलाती हैं। इन,