भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 288 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 57

पृथ्वी अक्षांश और देशान्तर का स्पष्टीकरण : ३९

रेखाओं से प्रकट होता है कि किसी स्थान की उत्तर या दक्षिण दूरी भूमध्य रेखा से कितनी है।

अक्ष=धुरी, अक्ष+अंश=धुरी का कोणार्मक अंश।

अर्थात् उससे प्रगट होता है कि उस स्थान में पृथ्वी की धुरी का झुकाव कोणार्मक अंश क्या है और भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण किसी स्थान विशेष की कोणार्मक दूरी का ही नाम अक्षांश है।

चित्र संख्या ५४—अक्षांश और देशान्तर

चित्र संख्या ५४ देखने से अक्षांश समझ में आ जायेगा। भूमध्यरेखा पर अक्षांश होता है और उसे निरक्ष देश कहते हैं क्योंकि वहाँ कुछ भी अक्षांश नहीं रहता। यहाँ से ज्यों-ज्यों उत्तर या दक्षिण की ओर जाओ तो अक्षांश बढ़ता जायेगा।

देशान्तर Longitude देश+अंतर=देशों का अंतर।

इसे मध्याह्न रेखा Meridian भी कहते हैं। किसी प्रधान रेखा Prime meridian से पूर्व या पश्चिम में किसी स्थान का अन्तर इससे नापा जाता है।

किसी प्रधान मध्याह्न रेखा से आरम्भ कर समानान्तर दूरी पर भूमध्य रेखा पर जो रेखाएं पूर्व-पश्चिम की दूरी बताने को खींची जाती हैं, वे ही देशान्तर रेखाएं कहलाती हैं। इन रेखाओं का एक छोर उत्तर ध्रुव में और दूसरा छोर दक्षिण ध्रुव