सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
चित्र संख्या ५५-अक्षांश और ध्रुव की ऊँचाई का नाप
सारांश इसका यह है कि उस स्थान पर ध्रुव तारा की जो ऊँचाई है उसी ऊँचाई का कोणात्मक अंश वहाँ का अक्षांश होता है। उत्तरी गोलार्द्ध के किसी भी स्थान का अक्षांश ध्रुव तारा की ऊँचाई से ज्ञात हो सकता है। जैसे लाहौर में ध्रुव तारा की ऊँचाई ३१°-३०' है तो वहाँ अक्षांश भी ३१°-३०' होगा। नरसिंहपुर में ध्रुव की ऊँचाई का कोण २२°-५७' है तो यहाँ का अक्षांश २२°-५७' हुआ।
उत्तरी गोलार्द्ध North Hemis Phere
भूमध्य रेखा से पृथ्वी के २ भाग हो जाते हैं। एक भूमध्य रेखा से उत्तर का आधा भाग, दूसरा दक्षिण का आधा भाग। भूमध्य रेखा से जो उत्तर का भाग है वही उत्तरी गोलार्द्ध है। इसके दक्षिण का भाग दक्षिणी गोलार्द्ध कहलाता है।
ध्रुव तारा उत्तर में है इसलिए वह केवल उत्तरी गोलार्द्ध वालों को दिखता है, यह दक्षिणी गोलार्द्ध वालों को नहीं दिखता।
(२) अक्षांश जानने की दूसरी रीति।
२१ मार्च या २३ सितम्बर को (जब दिन-रात बराबर रहता है) किसी स्थान के मध्याह्न कालीन (दोपहर के) सूर्य की जो ऊँचाई है वह ऊँचाई ९०° से घटा दें, घटाने से जो शेष रहे, वह उस स्थान का अक्षांश होगा।
जिस प्रकार ध्रुव तारा की ऊँचाई निकाली गई थी उसी प्रकार सूर्य की ऊँचाई भी निकाली जाती है। देखें चित्र संख्या ५६ और ५७