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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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अध्याय १४ : ६१

योग, और ( ५ ) करण, होने से उसे पंचाङ्ग कहते हैं । ये सब क्या हैं यह बतलाने के उपरान्त पंचाङ्ग देखना बतायेंगे । पंचाङ्ग के उपरोक्त ५ अंगों के अतिरिक्त सम्बत्सर, मास, अयन, ऋतु, ग्रह स्थिति, दिनमान, सूर्यादय आदि कई और आवश्यक विषय भी पंचाङ्ग में दिये रहते हैं । इन सबको पहिले समझ लेना चाहिए । वर्ष प्रमाण आदि जानने के पूर्व काल प्रमाण प्रत्येक को जानना आवश्यक है ।

काल प्रमाण Division of Time

त्रुटि—कमल के कोमल से कोमल १ पत्र में अति नुकीली सुई चुभाने में जो समय लगता है उसे त्रुटि कहते हैं ।

निमेष—पलक झपकाने में जो समय लगता है उसे निमेष कहते हैं ।

गुरु अक्षर—एक गुरु अक्षर के उच्चारण में जो समय लगे वह गुरु अक्षर है ।

प्राण—एक गुरु अक्षर के उच्चारण में जो समय लगे उसके १० गुने समय को प्राण कहते हैं ।

भगण काल—कोई ग्रह १ भगण (३६०°) चक्कर पूरा करने में जो समय लगावे ।

सावन दिन—एक दिन सूर्यादय होने के उपरान्त दूसरे दिन के सूर्यादय होने तक का जो समय है वह सावन दिन कहलाता है ।

१०० त्रुटि=१ लय=१ तत्पर

३० मुहूर्त=१ दिन रात

३० लय=१ निमेष

७ दिन=१ सप्ताह

१० गुरु अक्षर=१ प्राण=१ असु

३० दिन=१ मास

४५ निमेष=१ प्राण

१२ मास=१ वर्ष

६ प्राण=१ पल=विनाड़ी=विघटिका

३० नक्षत्र जहोरात्रि=१ सावन मास

३० सावन दिन=१ सावन मास

या=विघटी

३० चान्द्र तिथि=१ चान्द्र मास

१० विपल=१ प्राण या असु

१ संक्रांति से दूसरी संक्रांत तक } =१ सौर मास

६० विनाड़ी=१ नाड़ी=घटी

१२ मास (१ वर्ष)=१ दिव्य दिन

(पल)=घड़ी-दंड

३६० वर्ष=१ दिव्य वर्ष

६० नाड़ी=१ नक्षत्र दिन

(घटी)=जहोरात्रि=१ दिन रात

७३ घटी=१ ग्रहर

६० तत्परति विकला=१ प्रति विकला

६० प्रतिविकला=१ विकला

६० विकला=१ कला

८ ग्रहर=२४ घण्टा (होरा)

६० कला=१ अंश

=१ दिन रात

३० अंश=१ राशि

२ घटी=१ मुहूर्त

१२ राशि=१ सूचक=भगण=ज्योतिष

चक्र