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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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अध्याय १४ : ६३

१ नाट=१०१५ साधारण

मील=२०२८ गज

गज या मील-गज

१-१६० का

अन्तर पड़ेगा

∴ १ योजन=१३१/३ मील

या=मील-गज

१-१६०

[ १ ] युग प्रमाण

काल प्रमाण जानने के उपरान्त युग प्रमाण भी जानना चाहिए, क्योंकि पंचाङ्ग में दिया रहता है कि कलियुग के इतने वर्ष बीत गये हैं इत्यादि ।

कलियुग ४३२००० वर्ष का होता है । कलियुग का दूना द्वापर, तिगुना त्रेता, चोगुना सतयुग होता है । इन ४ युग का १ महायुग होता है । ७१ महायुग का १ मन्वंतर और १००० महायुग का १ कल्प या ब्रह्मा का एक दिन होता है । ३६० कल्प का ब्रह्मा का १ वर्ष होता है । प्रत्येक मन्वंतर के आदि और अन्त में सतयुग प्रमाण की १ संधि होती है । संधि को प्रलय काल भी कहते हैं । १५ संधि समेत एक मन्वंतर का १ कल्प होता है । ब्रह्मा की आयु ३६० कल्प X १०० वर्ष की होती है ।

सतयुग=१७२८००० वर्षमनु १४ हैं उनके नामवर्तमान कल्प के
त्रेता=१२९६००० ,,१ स्वायम्भुवआरम्भ से ७ संधियों
द्वापर=८६४००० ,,२ स्वारोचिषसमेत ६ मनु व्यतीत
कलियुग=४३२००० ,,३ उत्तमज (औत्तमि)हो चुके हैं उनके नाम-
१ महायुग=४३२०००० वर्ष४ तामस(१) स्वायम्भुव मनु
७१ महायुग=१मन्वंतर=५ रैवत(२) स्वरोचिष ,,
३०६७२०००० वर्ष६ चाक्षुष(३) उत्तमज ,,
१००० महायुग=१ कल्प७ वैवस्वत(औत्तमि) ,,
४३२००००००० वर्ष८ सावणि(४) तामस ,,
=ब्रह्मा का १ दिन९ दश सावणि(५) रैवत ,,
३६० कल्प=१ वर्ष ब्रह्मा का१० ब्रह्मा ,,(६) चाक्षुष ,,
आयु १०० वर्ष११ धर्म ,,इस समय सातवाँ
प्रत्येक मन्वंतर के आदि और१२ रुद्र ,,वैवस्वत मनु वर्तमान
अन्त से १ संधि सतयुग१३ देव ,,हैं । इसके आरम्भ से
प्रमाण=१७२८०००१४ इन्द्र ,,आज तक २७ महायुग

बीत चुके हैं २८ वें महायुग में ३ युग बीत कर चौथा युग कलियुग वर्तमान है ।