भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 288 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 9

उद्देश्य

बहुत से ज्योतिष ग्रन्थों के होने पर भी इस पुस्तक के लिखने की क्यों आवश्यकता हुई यहाँ संक्षेप में यह बता देना अनुचित न होगा।

आज कल पाश्चात्य देशों में भी फलित में विश्वास बढ़ने लगा है। कई पुरुष स्वयं भी अनुभव कर फलित पर विश्वास करने लगे हैं, इस कारण इस शास्त्र के अध्ययन की ओर लोगों की रुचि बढ़ रही है, परन्तु ज्योतिष के अधिकतर ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं और वे ग्रन्थ विद्वानों के समझने योग्य ही लिखे गये हैं, अर्थात् वे ही उनको समझ सकते हैं जो उस विषय में कुछ जानते हों। परन्तु जो उस विषय में कुछ भी न जानते हों उनके समझने में वे पुस्तकें भाषा टीका में होने पर भी समझ में नहीं आ सकती। कारण कि नवीन विचार्यों को उन पुस्तकों के समझने में बड़ी कठिनाई होती है। संस्कृत की भी उतनी योग्यता प्राप्त करने का समय या साधन का अभाव भी बहुत खटकता है।

इस कारण राष्ट्रभाषा हिन्दी में एक ऐसी पुस्तक की आवश्यकता है कि जिससे कोई विचार्यों यदि ज्योतिष का एक अक्षर भी न जानता हो तो बिना किसी दूसरी पुस्तक का सहारा लिये घर बैठे स्वयं ज्योतिष का अध्ययन कर सके।

मैंने भी ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन में बहुत वर्ष व्यतीत किये हैं और कई पण्डितों से मिल कर इसका अध्ययन करते समय आवश्यक संक्षिप्त नोट भी तैयार करता गया जिससे उस विषय की विस्मृति न हो।

कई मित्रों ने जिनको इस विषय के अध्ययन की तीव्र इच्छा हुई ये नोट देख कर प्रसन्न हुए और जन साधारण के लाभार्थ प्रकाशित करा देने की सम्मति दी। इस कारण इस पुस्तक के प्रकाशित करने की आवश्यकता हुई।

यह पुस्तक इस बात को ध्यान में रखकर लिखी गई है कि पाठक इस विषय से अनभिज्ञ हैं, इसी कारण किसी विषय को समझाते समय नवीन विचार्यों को अध्ययन करते समय कठिनाई न हो, कहीं-कहीं एक बात की पुनरुक्ति भी करनी पड़ी है और इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि कोई कठिन शब्द न आवे जिससे भावार्थ समझने में कठिनाई जान पड़े। जहाँ आवश्यक हुआ है वहाँ कठिन शब्दों को समझा दिया गया है। पारिभाषिक शब्द तो सर्वत्र ही समझा दिये गये हैं। इसमें स्थान स्थान पर विशेष शब्दों के अंग्रेजी में भी अर्थ दे दिये गये हैं जिससे अंग्रेजी जानने वालों को इसके अतिरिक्त भी इतर अंग्रेजी के ज्योतिष ग्रंथों को भी समझने की योग्यता प्राप्त हो जायगी। तात्पर्य यह है कि शास्त्ररूपी सागर को पार करने के लिये पाठक इस पुस्तक को नौका रूप में पायेंगे।