भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अष्टक वर्ग विचार : १०३

स॒वं अष्टक वर्ग चक्र का उदाहरण

राशि ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १ २ “ग्रह लग्न शनि मंगल केतु गुरु चन्द्र सूयं योग रा बुध शुक्र सूर्यं ५ ३ .४ ६ २ ७ ४ २ ३ ३ ५ ४ ४८ चन्द्र है ४ इ. ४ ३. ३. ७ ९ र कर TERS मंगल ५ ३ ५ १ २ ४ ५ २ ३ २ ४ ३ ३९ बुध ३ ६° ४ ४ रा डी Ev NINN RR गुर

शुक्र ३ थे ४ ह. ६ ६ ७ डो NT भ Rr ४ ४ ४२० ४४ दा RN Ou र ENS शनि ४ २ ३ ४ ४ ३ ४ ४ १ ३ ४ ३९ छन ४ ४ ४ ३ ३ ७३ ४३४३ ३४३ ४५ ४ ४९ शुभयोग ३७ ३१ ३२ २९ ३० ४३ ३९ ३२ २३ २६ ३७ २७ ३८६ सर्वयोग

यहाँ सूर्ये अष्टक वर्ग चक्र में जो योग शुभ रेखाओं का आया था वह सूर्य के आगे लिख दिया । चन्द्र अष्टक वर्ग चक्र का योग चन्द्र के सामने लिख दिया इसी प्रकार प्रत्येक अष्टक वर्ग चक्र के योग को वहाँ लिखकर अन्त में सब का योग कर दिया है । यहाँ १२ भाव का शुभ रेखा चक्र नीचे लिखें अनुसार हुआ । इन रेखाओं से शुभाशुभ फल का विचार होता है। इसी से सबै अष्टक वर्ग कुंडली बनती है । द्वादश भावस्थ शुभ रेखा योग चक्र राशि ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १ १ २ भाव लग्न धन सहज चतुर्थ पंचम षष्ठ सप्तम अष्टम नवम दशम ळाभ व्यय शुभरेखा योग ३७ ३१ ३२ २९ २९ ४३ ३९ ३१ २३ २६ ३७ २७

त सर्वं अष्टक वर्ग कुण्डली पिछले दिये हुए शभ योग को यहाँ कुंडली में रख दिया है जिससे प्रकट हो कि

भाव को कितनी रेखा मिली हैं ।

इस सवं अष्टक वर्ग कुंडली में कोई लग्न छोड़ कर केवळ ग्रहों का शुभ योग दे

देते हैं कोई लग्न सहित देते हैं या प्रथम

दोनों दे देते हैं ।

इनं रेखाओं का क्या क्या फल होता

है आगे दिया है ।

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