भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१०४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

सवं अष्टक वगं कुण्डली.से अवस्था का विचार (१) बाल्यावस्था प्रथम खंड आदि खंड की राशियाँ १२-१ २३ (२) युवावस्था द्वितीय खंड मध्य खंड की राशियाँ ४+५+६+७ (३) वृद्धावस्था तृतीय खंड अन्त खंड की राशियाँ ८-९-१०११

की मीन राशि से आरम्भ कर ४-४ राशियों का एक खंड होता है। इन्हीं राशियों

है

सर्वे शुभ रेखाओं का योग करने से स्थूल रूप से जीवन का शुभाशुभ समझा जाता

जोड़ी

। इसमें

जाती विशेष

। बात यह है कि इसमें अष्टम एवं द्वादश स्थान की राशियाँ नहीं : ऊपर की सवं अष्टक वर्ग कुंडली देखो (१) राशि १२ १ ३ योग १०० रेखा इसमें वृष राशि व्यय भाव रेखा २६ ३७ ३७ में पड़ने से छोड़ दिया । (३) इगि ३१ $ याम १२२ रेखा इन सबको पूरा ल्या ।

(३) राशि ८ ९ ११ रेखा ४३ ३९ २३ योग १०५ रेखा इसमें मकर राशि अष्टम में पड़ने

योग कप

इसका

है

और भी विचार इस प्रकार होता है कि जो तीनों खंड की रेखाओं का

उस खंड में सुख उसके

अधिक ३ भाग रहेगा करना । । इस तृतीयांश से जिस खंड में रेखा अधिक हो “७2

भाव को रेखाओं के अनुसार आयु खंड पर विचार

उसका प्रत्येक

उदाहरण खंड मे नीचे ऐयक-पुथक

दिया भाव की रेखाओं पर से भी फल का विचार होता है है-- १ खंड भावं १० ११ १२ १ राशि १२ १ २ ३ ब स २11६ रा