सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 113, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टक वर्ग विचार: १०५
२ खंड भाव २ ३ ४ ष्र राशि ¥ ण ६ ७
रेखा ३१ ३२ २९ ३०
ग्रह + श० + x
३ खंड भाव ६ ७ दु ९ राशि ऱ ९ १० ११
रंखा ४३ ३९ ३२ २३
ग्रह मं० के० गु० चण्बु०
(१) यहाँ प्रथम बाल्यावस्था में दशम भाव में २६ रेखा हैं । २७ से अधिक रेखा
शुभ समझी जाती हैं। यहाँ २७ से कुछ ही कम हैं तो व्यापार पिता कमं आदि संबंध
से साधारण फल होगा मध्यम फल के लगभग है । क्योंकि इस भाव में सूयं और शुक्र
भी है । जिससे कुछ मिश्र उन्नति साधारण प्रकार से होगी।
लाभ में ३७ रेखा हैं अधिक रेखा होने से आथिक सुख अच्छा रहेगा । व्यय में
२७ रेखा होने से व्यय की समता रहेंगी । लग्न में ३७ रेखा होने से शारीरिक सुख
आरोग्यता आदि उत्तम रहेगा ।
(२) द्वितीय खंड में धन भाव में ३१ रेखा होने से धन का लाभ अच्छा रहेगा ।
तृतीय भाव में ३२ रेखा होने से भाई बंधुओं का सुख श्रेष्ठ रहेगा । परन्तु इसमें शनि
होने से पूणं सुख में कुछ हानि करेगा । चतुर्थ में २९ रेखा है सुख, माता हा सुख
आदि साधारण अच्छा रहेगा ! पंचम में ३० रेखा हैं इससे बिद्या संतान आदि का सुख
साधारणतः अच्छा रहेगा |
(३) तृतीय अवस्था में रिपु भाव में ४३ रेखा हैं शत्रु रोग आदि का नाश होकर
पूर्ण सुख रहेगा । सप्तम में ३९ रेखा है । स्त्री सुख अच्छा रहेगा परन्तु इष्ट में पाप
ग्रह केतु के होने से स्त्री सुख क्षीण करेगा बाधा उत्पन्न करेगा । अष्टम में ३३ रेखा हैं
स्वास्थ्य ठीक रहेगा । इसमें गुरु शुभ ग्रह होने से स्वास्थ्य सम्बन्धी सुख अच्छा
रहेगा । नवम में केवल २३ रेखा हैं मध्यम से कुछ कम रेखा हैं इससे धमं आदि संबंध
'से कुछ कष्ट होगा परन्तु इसमें शुभ ग्रह चन्द्र और बुध होने से शुभता को बढ़ावेगे ।
इससे धमं आदि की हानि नहीं होने पायगी ।
इस प्रकार रेखाओं से साधारण प्रकार से फल का विचार होता है । यहाँ लाभ
भाव में ३७ रेखा हैं व्यय में २७ ही रेखा हैं | लाभ से व्यय में कम रेखा होने से
अच्छा है। लग्न में व्यय से अधिक रेखा हैं ३७ रेखा हैं इससे जातक धनवान् ओर
"भाग्यवान् रहेगा ।
अवस्था के खण्ड त्रय विचार में कुछ मतान्तर भी है
खंड त्रय कोई भाव के अनुसार गिनते हैं :--
(१) खंड १२-१-२-३ भाव का (१) खंड लग्न, २, ३, ४ भाव का (२) खंड ४, ५, ६, ७ भाव का (२) खंड ५, ६, ७, ८ भाव का (३) खंड ९, १०, ११ भाव का (३) खंड ९,१०,११,१२ भव का