भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१०६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

परन्तु ये मत अधिक मान्य नहीं हैं । उपरोक्त मत ही मान्य हैं।

अष्टक वर्ग रेखाओं का फल आगे दिया है ।

(४) तीनों खंड में बराबर रेखा हो तो जीवन सदा एक सा रहेगा । जिस खंड

में कम रेखा हों उस भाग में सुख कम होगा । बहुत ही कम रेखा हों तो उस भाग

में रोग संताप आदि से पीड़ा होगी । जिस भाग में बहुत रेखा हों वह भाग सुखदाई

एवं उन्नतिकारी होगा । अष्टक वर्ग की रेखा या शून्य पर से शुभत्व विचार

यहाँ रेखा शुभ और शून्य अशुभ बताया है।

रेखा बिन्दु शुभ अशुभ विचार ८-० ८-० ऊष +१ पूणं शुभ अधिक

  • ७+१ ७--१ +६/८ + ३/४ पौन शुभ अधिक

६५२ ६२ +४/ष + १/२ आधा शुभ अधिक

५+ हे श- रे --२॥/८ + १/४ पाव शुभ अधिक `

४--४ ४-४ +०|ऽ +° समफल सम

३+५ ३—५ २/७८ --१/४ पाव अशुभ अधिक

२+६ २६ ४८ --१/२ आधा अशुभ अधिक

१०७ १--७ --६|८ --३/४ पोन अशुभ अधिक

०+ ०_—ष _८|ष १ पूर्ण अशुभ अधिक

साधारण प्रकार से ८ रेखा पूर्ण शुभ फल । ६ रेखा पौन शुभ फल । ४ रेखा,

आधा शुभ फल । २ रेखा पाव शुभ फल ऐसे ही बिन्दुओं से अशुभ फल समझना ।

अर्थात्‌. किसी अष्टक वर्ग की राशि में पूरी ८ रेखा हो तो वहाँ पूर्ण शुभता होगी ।

यदि शुभ रेखा एक भी न हो पूरे ८ शून्य हों तो वहां पूर्ण अशुभता रहेगी । यदि ४

रेखा ओर ४ शून्य हो तो अच्छा और बुरा फल बराबर होकर सम फल होगा यदि ७

रेखा हों तो उसमें एक अशुभता आने से उस राशि में पौन शुभता की अधिकता रहेगी

यदि ७ विन्दु हों तो उसमें अशुभता तो अधिक रहेगी परन्तु पूरा अशुभ फ नहीं होगा पौन अशुभ फल होगा । जहा+चिल्व है वहाँ शुभता अधिक रहेगी । जहाँ-ऋण चिह्न है वहाँ अशुभता अधिक रहेगी । अब रेखाओं के अनुसार शुभाशुभ फल का विचार नीचे दिया है (१) रेखाफछ- नाना रोग, दुःख, भय, कष्ट, देशाटन ।

(२) रेखाफल--मन में संताप, राज भय, चोर हानि, धन हानि ।

(३) रेखाफल- मानसिक विफलता, यात्रा, शरीर कष्ट, दुःख, व्यसन । (४) रेखाफल--समफल, सुख और दुःख, धन का लाभ और व्यय ।

(४) रेखाफल--सन्तान सुख, धनागम, सन्त संगति, कल्याण, आरोग्य, नित्य सुख, विद्या लाभ ।

(६) रेखाफल--यश, घन, वाहन, साहस,, विजय, चित्त, घन लास. !