सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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१०६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
परन्तु ये मत अधिक मान्य नहीं हैं । उपरोक्त मत ही मान्य हैं।
अष्टक वर्ग रेखाओं का फल आगे दिया है ।
(४) तीनों खंड में बराबर रेखा हो तो जीवन सदा एक सा रहेगा । जिस खंड
में कम रेखा हों उस भाग में सुख कम होगा । बहुत ही कम रेखा हों तो उस भाग
में रोग संताप आदि से पीड़ा होगी । जिस भाग में बहुत रेखा हों वह भाग सुखदाई
एवं उन्नतिकारी होगा । अष्टक वर्ग की रेखा या शून्य पर से शुभत्व विचार
यहाँ रेखा शुभ और शून्य अशुभ बताया है।
रेखा बिन्दु शुभ अशुभ विचार ८-० ८-० ऊष +१ पूणं शुभ अधिक
- ७+१ ७--१ +६/८ + ३/४ पौन शुभ अधिक
६५२ ६२ +४/ष + १/२ आधा शुभ अधिक
५+ हे श- रे --२॥/८ + १/४ पाव शुभ अधिक `
४--४ ४-४ +०|ऽ +° समफल सम
३+५ ३—५ २/७८ --१/४ पाव अशुभ अधिक
२+६ २६ ४८ --१/२ आधा अशुभ अधिक
१०७ १--७ --६|८ --३/४ पोन अशुभ अधिक
०+ ०_—ष _८|ष १ पूर्ण अशुभ अधिक
साधारण प्रकार से ८ रेखा पूर्ण शुभ फल । ६ रेखा पौन शुभ फल । ४ रेखा,
आधा शुभ फल । २ रेखा पाव शुभ फल ऐसे ही बिन्दुओं से अशुभ फल समझना ।
अर्थात्. किसी अष्टक वर्ग की राशि में पूरी ८ रेखा हो तो वहाँ पूर्ण शुभता होगी ।
यदि शुभ रेखा एक भी न हो पूरे ८ शून्य हों तो वहां पूर्ण अशुभता रहेगी । यदि ४
रेखा ओर ४ शून्य हो तो अच्छा और बुरा फल बराबर होकर सम फल होगा यदि ७
रेखा हों तो उसमें एक अशुभता आने से उस राशि में पौन शुभता की अधिकता रहेगी
यदि ७ विन्दु हों तो उसमें अशुभता तो अधिक रहेगी परन्तु पूरा अशुभ फ नहीं होगा पौन अशुभ फल होगा । जहा+चिल्व है वहाँ शुभता अधिक रहेगी । जहाँ-ऋण चिह्न है वहाँ अशुभता अधिक रहेगी । अब रेखाओं के अनुसार शुभाशुभ फल का विचार नीचे दिया है (१) रेखाफछ- नाना रोग, दुःख, भय, कष्ट, देशाटन ।
(२) रेखाफल--मन में संताप, राज भय, चोर हानि, धन हानि ।
(३) रेखाफल- मानसिक विफलता, यात्रा, शरीर कष्ट, दुःख, व्यसन । (४) रेखाफल--समफल, सुख और दुःख, धन का लाभ और व्यय ।
(४) रेखाफल--सन्तान सुख, धनागम, सन्त संगति, कल्याण, आरोग्य, नित्य सुख, विद्या लाभ ।
(६) रेखाफल--यश, घन, वाहन, साहस,, विजय, चित्त, घन लास. !