सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 115, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंभष्टक वर्ग विचार : १०७
(७) रेखाफल--वाहन, सुख, धन एवं पद वृद्धि, पूर्ण सुख सम्पत्ति की वृद्धि 1 (ऽ) रेखाफल--राज सम्मान, श्रेष्ठ लक्ष्मी की प्राप्ति, सब मनोरथ सिद्ध, सुख दायक समय, कार्य पूर्ण ।
५ से अधिक रेखा ( शुभ ) जिस राशि में हो उस राशि में अपने अष्टक वर्ग में ग्रहों ग्रह वह सदा शुभ होता है । अल्प रेखा वाला ग्रह गोचर में दुष्ट फल देता है । ग्रहों के अनुसार अष्टक वर्ग का रेखा बिन्दु फल १. सूर्य रेखा--जिस भाव से उत्पन्न हुई सूर्य की रेखा हो तो शत्रुओं का पराजय, सहसा सिद्धि ।
“विन्दु अशुभ फल दायक, अधिक व्यसन करने वाला, रोग शोक देने वाला, बिना कारण राजा द्वारा उद्देग ।
२. चन्द्र रेखा--वस्त्र भूषण, भोजन प्राप्ति, राजा से सम्मान, अकस्मात् उत्तम कमं की प्राप्ति\ ` :
“बिन्दु ' कष्ट फळ, शत्रुओं से कलह, दुष्ट स्वप्न, वित्त धन का नाश । ३. मंगल रेखा-सदा अथे को प्राप्ति, आरोग्यता,आयुष्य की वृद्धि, कांति की वृद्धि 1 “बिन्दु” सदा जठराग्नि का रोग, सिर पीड़ा, रक्त पित्त का रोग ।
४ बुध रेखा-सुख ओर मिष्ठान्न भोजन लाभ, दान कमं में धमं में रत, देव द्विज और अग्नि का पूजक ।
'बिन्दु' भंग, शत्रुओं से कलह, दुःस्वप्न दर्शन, नित्य असमय भोजन ।
५ गुरु रेखा--सदा धन सुख आदि तथा पुष्टि, स्त्री भोग दायक है शत्रु का नाश मनोत्साह अधिक,अतुळ विभव वस्त्र सुवर्ण सुख आदि की वृद्धि बंधु वर्ग से सौख्यछाभ ॥ “बिन्दु” कष्ट, धन और बुद्धि का नाश, मानसिक एवं घर की चिता,मागं में दुःख, वाहन से पतन, सर्वत्र कलह, अपने ही वचनों द्वारा अपमान, शत्रुओं से द्वेष के कारण
खर्च और साहस से कार्य हानि ।
६. शुक्र रेखा--राज सम्मान वृद्धि, कपट का लाभ, शरीर का सुन्दर सुख,
दीर्घायु, क्रीडा ( खेल ) में मग्न, ज्ञान प्राप्ति, अर्थ की सिद्धि, लक्ष्मी का लाभ, सुख
सम्पत्ति की वृद्धि ।
“बिन्दु! शत्रु से कष्ट, धन नाश, स्त्री को पीड़ा, कलह, भूमि का नाश, बुद्धिनाश, सदा अधिक खर्च, घोडे से गिरना, मार्ग में चोर भय आदि ।
७. शनि रेखा- श्रेष्ठ फल, नौकरों के हेतु धन, कार्य सिद्धि, राजा से मित्रता,
सत्पुरुषों से सम्बन्ध, भूमि की प्राप्ति, दुष्ट जनों से जय प्राप्त हो, स्नान, दान, पूजन में
प्रेम, राज आश्रय से मिष्ठान्न भोजन खेती तथा धान्य की वृद्धि हो ।
“बिन्दु! कष्ट, राज से भय, बन्धुजनों में पीडा की वृद्धि धातु शस्त्र या दुष्टजनों से
धन नाश, चित्त में उद्देग, भुमि का नाश, कलह, बुद्धि नाश, वाहन से हीन ।
इन रेखः या विन्दुओं का फल--इनकी संख्या अधिक हो तो अधिक फल होगा ।
संख्या अल्प होगी तो अल्प फल होगा ।