भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२०८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

समुदाय रेखा अनुसार भाव फल

जिस भाव में ३० से अधिक रेखा हों वह शुभ । २५ से ३० रेखा हों तो मध्यम

'फल । २५ से कम रेखा हों तो वह भाव या राशि अशुभ है कष्ट प्रद होती है । जिस

राशि में ७ रेखा या कम हो उस महीने में ( उस राशि के सूयं में ) मृत्यु भय हो इस

के दोष निवारण के लिए उचित दान द्वारा शांति करायें।

८ रेखा--मृत्यु संभावना ।

९ रेखा--सर्प भय ।

१० रेखा- शस्त्र भय ।

११ रेखा--मिथ्या अपवाद का भय ।

१२ रेखा--जल में डूब कर मरने का भय ।

१३ रेखा- व्याघ्र आदि हिंसक जन्तु से मृत्यु भय ।

१४ रेखा- मृत्यु भय या धमं अर्थ काम की हानि, अंग पीड़ा, व्याधि ।

'१५ रेखा--राजभय, या बडी आपत्ति ।

१६ रेंखा--अरिष्ट भय या राजभय अंग पीड़ा व्याधि ।

१७ रेखा--रोगभय या नाश, दुःख, हानि ।

१८ रेखा--कलहभय या धन हानि ।

१९ रेबा--प्रवास ( विदेश वास ), या कुपति एवं बंधु वर्ग से कष्ट ।

२० रेखा--बुद्धिनाश, कलह ।

२१ रेखा--रोग कष्ट, हृदय में दुःख या हृदय रोग

२२ रेखा--बन्धुओं को पीड़ा, अपमान, कार्य में निष्फलता, पराजय, दीनता,

चुद्धि भ्रष्ट । रे

२३ रेखा--स्वयं कष्ट, धमं काम तथा अर्थ की हानि ।

२४ रेखा--बन्धुओं की मृत्यु, अकस्मात धन हानि ।

२५ रेखा--बुद्धि हानि, हस्तागत द्रव्य की हानि ।

२६ रेखा--धन हानि, कलह क्लेश ।

२७ रेखा--धन हानि, समता दुःख सुख की समता, शुभाशुभ फल की समता ।

२८ रेखा--सर्वांश में हानि या धनागम सुख, मान प्राप्ति ।

२९ रेखा-- अनेक चिता से व्याकुल, या मनुष्यों में पूज्यता ।

३० रेखा--घन धान्य की पूर्ण प्राप्ति, र।ज पूज्यता, पुण्य, सुख, मान ।

३१ रेखा--धन, सुकृत और सुख प्राप्त ।

| ~ ___ ३२ रेखा-विशेष सम्मान ।

.। ३३ रेखा--समस्त सिद्धि, विशेष लाभ । | ३१ से ५६ तक--अधिक उत्तम फल की उत्तरोत्तर वृद्धि हो राज्य प्राप्ति कार्य

. सिद्धि बादि हो ।