भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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११६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

भौर भो विचार

(१) जन्म समय जो राशि और नवांश हो, जव गोचर में ग्रह उस घर में उतना

अन्तर पार करके जाता है तो उस भाव का अच्छा या बुरा जैसा फल हो प्रगट करता है।

(२) किसी ग्रह के अष्टक वर्ग में सवसे अधिक रखा हो तो देखो कि वह किस

भाव में है और भाव की गिनती कारक ग्रह लग्न मान कर करो ।

(३) ग्रह चाहे शुभ हो या अशुभ अधिक रखा हो तो उस भाव के फल को बढ़ाता है अर्थात्‌ अच्छा फल देता है । यदि ग्रह कोई ऐसे भाव में जावे जिसमें शुभ रखा न हों

या बहुत कम रेखा हों तो उल्टा फल्न देगा अर्थात्‌ उस भाव का बुरा फल प्रगट कर गा।

(४) चन्द्रमा या लग्न से ३-६-१०-११ घर में या अपने घर में या उच्च में या

मित्र गृही या त्रिकोण में ग्रह हो अधिक रेखा होने से अष्टक वर्ग में वह पूर्ण फल देगा।

(५) परन्तु जो अपव्यय अर्थात्‌ १,२,४,५,७,५,९,१२ स्थानों में हो या नीच में

या पाच गृही हो तो पूर्ण फक्त नहीं देगा ।

अष्टक वर्ग का त्रिकोण शोधन

` श्रस्मेक ग्रह के अष्टक वर्ग से प्राप्त शुभ र खाओं के योग का त्रिकोण करना पड़ता

है उसके पश्चात्‌ त्रिकोण शोधन से प्राप्त संख्या का ऐकाधिपत्य शोधन करना पड़ता है

. त्रिकोण शोधन की सुगमता के निमित्त आगे बताये अनुसार त्रिकोण की ३-३

राशियों का एक चक्र बना रो जिससे भुळ न होने. पाये । १,५,९ पहिला २,६,१० दूसरा ३,७,११ तीसरा और ४-८-१२ राशियां चोथे त्रिकोण की हैं। ..

इस चक्र में प्रत्येक ग्रहों के अष्टक वर्ग की शुभ राशियों का योग प्रत्येक राशि के

नीचे छिख दो । जेसे सूर्य अष्टक वर्ग में मिथुन में ५ रेखा है तो सूर्य के चक्र में मिथुन

के नीचे ५ लिख दो । ककं में ३ रेखा हैं तो जिस त्रिकोण में ककं राशि हो वहाँःकर्क॑

के नीचे ३ लिख दो। सिंह के नीचे ४ लिख दो इसी प्रकार सव राशियों के नीचे

सूर्य के अंक लिख दो। पश्चात्‌ चन्द्र आदि सत्र ग्रहों के अंक लग्न सहित भर दो।

त्रिकोण शोधन के लिए ३ बातों का ध्यान रखो ।

(१) त्रिकोण की ३ राशियों में से किसी एक राशि की संख्या रेखा की कम हो

तो उस अल्प रेखा की तीनों संख्या को उस त्रिकोण की तीनों संख्याओं में से घटा देना । इस प्रकार घटाने से जो अंक बचे वही त्रिकोण शोधन का अंक हुआ ।

(२) यदि उस त्रिकोण की रेखा संख्या में तीनों संख्या में से किसी में शून्य हो तो

बहु संख्या ज्यों की त्यों रहेगी - क्योंकि सवसे छोटा अंक० जब सव में से घटाया

जायगा तो कोई अन्तर नहीं आयगा वही संख्या रहेगी ।

(३) यदि उस त्रिकोण में तीनों संख्या बराबर हो तो सव ० हो जायगा क्योंकि

सबसे छोटा वही अंक है सव घटाने से ० ही बचेगा ।

अभिप्राय यह हे कि त्रिकोण की सबसे छोटी संख्या उस त्रिकोण को तीनों

संख्याओं में से घटाने से जो बचे वही अंक त्रिकोण शोधन का हुआ । आगे चक्र देखने

से सव समझ में आ जायेगा ।