भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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5” च

अष्टक वर्ग विचार : ११५

सम्बन्धी विचारणीय बातों में समता रहेगी ।

यहाँ उपरोक्त चारों ग्रहों का धर्म भाव सम्बन्धी बातों में कष्टप्रद फल होगा ।

केवळ गुरु समता सूचक शेष पाप गृह का प्रभाव दुःख भय ही होगा ।

(५) गोचर में शुक्र मीन का है। शुक्र के अष्टक में मीन में ४ रेखा हैं जिसका

फल सम ( मध्यम ) है । जन्म में मीन राशि दशम भाव में है। इससे दशम भाव

सम्बन्धी फल कमं, व्यापार आदि में समता रहेगी ।

(६) गोचर में बुध मकर का है । बुध अष्टक में मकर की २ ही रेखा हैं जो

कष्टप्रद है। जन्म में मकर राशि अष्टम भाव में हैं। इससे अष्टम भाव सम्बन्धी

विचारणीय बातों का कष्ट ही रहेगा ।

(७) गोचर में शनि मकर का है शनि अष्टक में मकर में ५ रेखा हैं जो शुभ का

सूचक है । जन्म में मकर राशि अष्टम में है इससे अष्टम भाव की विचारणीय बातों

का सुख ही रहेगा ।

यहाँ गोचर में मकर राशि में बुध और शनि दोनों हैं एक का फल खराब एक का

अच्छा हे इससे शुभाशुभ फल होगा ।

किसःकिस भाव से किन-किन बातों का विचार होता है यह अन्यत्र दे चुके हैं

इससे यहाँ संक्षिप्त विचार किया है।

(८) यहां पर बात ध्यान देने की है कि सूर्य अष्टक० में सूर्य की कन्या में ६

रेखा और मकर में ७ रेखा है । जन्म में कन्या राशि चतुर्थ भाव में है । जव कन्या का

सूथं होगा सुख की अधिक वृद्धि हो । जन्म में मकर राशि अष्टम भाव में है। जब

मकर का सूर्य होगा रोगादि दूर होकर स्वास्थ्य ठीक रहेगा ।

(९) चन्द्र अष्टक वर्ग में सिह में ६ रेखा हैं धन में ७ रंखा हैं । जन्म में सिंह

राशि भ्रातृ स्थान में है सिह चन्द्र में भाइयों का अति सुख होगा । धनु भाव सप्तम

में है जव सप्तम में चन्द्र आयेगा सप्तम भाव सम्वन्धी वातों का बहुत सुख होगा ।

(१०) बुध अष्टक वर्ग में वृश्चिक में ८ रेखा हैं जन्म में यह पष्ठ भाव में है वृश्चि-

क का बुध हो तो शत्रुओं का नाश होकर पष्ठ भाव सम्बन्धी बातों में बहुत'सुख होगा।

(११) गुरु अष्टक वर्ग धन में ७ रेखा हैं। जन्म में घन राशि सप्तम में है धन

का गुरु होने पर सप्तम भाव सम्बन्धी बातों का अधिक सुख देगा ।

(१२) शनि अष्टक वर्ग में वृष में २ ही रंखा हैं बहुत अशुभ है। जन्म में

बूषराशि व्यय स्यान में है । वृष के शनि में अधिक खर्च का कष्ट उठाना पड़ेगा ।

(१३) मंगळ अष्टक में कन्या में एक ही रेखा है । जन्म में कन्या राशि चतुर्थ में है

इससे कन्या फे'मंगल में अति कष्ट होगा एवं चतुर्थ भाव सम्बन्धी बातों की हानि होगी ।

इसी प्रकार ग्रहों के अष्टक वर्ग रखा संख्या पर से समझ लेना कि गोचर में कोन

ग्रह किस राशि में अच्छा होगा कब बुरा होगा और वह किस भाय सम्वन्ध से अच्छा

या बुरा फल प्रगट करेगा ।