सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 122, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें११४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
इसी प्रकार गोचर में वह ग्रह जिस राशि में हो इस ग्रह के अष्टक वर्ग रेखा
बिन्दु से उसका शुभाशुभत्व का ज्ञान कर लेना ।
( ४ ) यदि वर्ष का विचार करना हो तो गुरुके अष्टक वर्ग से विचार करना
यंदि मास का विचार करना हो तो सूर्य के अष्टक वर्ग से विचार करना
यदि दिन का विचार करना हो तो चन्द्र के अष्टक वर्ग से विचार करना।
(५ ) रेखा या बिन्दु का विश्वाज्ञान
रेखा या बिन्दु = है > २॥-१० विश्वा । रेखा या विन्दु में २॥ का गुणा कर्ने से
उसका विश्वा का ज्ञान होता है । जैसे ५ रेखा % २।-१२।। विशवा शुभ फल ३ बिन्दु
है ३% २॥-७॥ विश्वा अशुभ फल होगा । परन्तु जिस क्रम से रेखा या बिन्दु अष्टकवर्ग चक्र में है उसी क्रम से शुभ या अशुभ फल होगा ।
अब अष्टक वर्ग की रेखा द्वारा जन्म कुण्डली के सम्बन्ध से गोचर फल
विचार करते हैं--
सम्बत् २०१८ फाल्गुन अमावस्या
मंगलवार का गोचर चक्र लगन कुण्डली जन्म की
“को NA { RD 0026५ १ हे. च. मं. गु. } 0
(१) गोचर में सूर्य कुम्भ राशि में है। सूर्य अष्टक मे कुम्भ में ३ रेखा है जो कष्ट सूचक है 1 लग्न कुंडली म कुंभ राशि घमं भाव में है। इससे धर्म भाव सम्बन्धी विचारणीय बातों में कष्ट या दुःख होगा। (२) गोचर में चन्द्र कुंभ राशि में है। चन्द्र अष्टक में कुंभ में २ ही रेखा हैं जो अतिकष्ट सूचक है । जम्म में यह कुभ राशि घमं भाव में है इससे धर्म सम्बन्धी विचा- रणीय बातों की हानि होगी और दु:ख होगा । 5 (३) गोचर में मंगल भी कुंभ में है। मंगल के अष्टक में कुंभ राशि की ३ ही रेखा हैं जन्म में कुंभ राशि धर्म भाव में है। इससे धर्म भाव की विचारणीय वातो का कष्ट होगा ।
(४) गोचर में गुरु भी कुंभ राशि में हे । गुरु अष्टक में कुंभ को ४ ही रेखा हैं जिसका फल समता सूचक है । जन्म में यह कुंभ राशि धर्म भाव में है जिससे धमं भाव