सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 129, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टक वर्ग बिचार : १२१
४% ८=३२ उसके नीचे लिखा । इसी प्रकार सव अंकों में राशि के अनुसार राशि गुणक
का गुणा कर रखा है। ग्रह गुणक
ग्रह । सूर्य । चन्द्र मंगल । वुध । गुरु । शुक्र । शनि ।
गुणक । ५। ५। ८।५।१०। ७ | ५ ॥
जिस-जिस राशि में ग्रह हो उसके ऐका० शोधन की रेखा में जो-जो ग्रह हो उन-उन
का उस अंक में गुणा कर रखना यदि एक से अधिक ग्रह एक ही राशिमें हों तो प्रत्येक
ग्रह के गुणक से गुणा कर सवका योग वहां रखना । जहाँ रेखा न हो वहाँ ० रखना ।
जैसे राशि ५ में शनि है, १० में गुर, ११ में चन्द्र बुध १२ राशि में सूर्य शुक्र है इनके
नीचे ऐकाधिपत्य शोधन. अंक ० है इससे इन सब के नीचे शून्य रहा । केवल मंगल
वृश्चिक में है जिसकी ऐका० शो० के पश्चात् ४ रेखा बची है । मंगल का गुणक ८ है
४> ८-३२ अंक ग्रह गुणक को वहां रख दिया । शुक्र का देखो मौन राशि में सूर्य
और शुक्र है ऐ का० शो० अंक १ बना था । सूर्य का गुणक ५ है १२ ५-५ । शुक्र
का गुणक ७ है १३ ७- ७, ५+ ७२१२ ग्रह गुणक मीन का शुक्र के अष्ट ० में आया
इसी प्रकार सबका समझ लेना ।
'राशिपिण्ड बनाना
प्रत्येक राशियों के गुणक दिये हैं। यदि किसी राशि में ऐकाधिपत्य शोधन के
पश्चात् जो अंक बचा हो उस अंक में उस राशि का गुणा करना सम्पूर्ण राशियों में
इस प्रकार गुणा करने से जो अंक प्राप्त हो उन सब का योग करना वही राशिपिंड है।
जै>े मंगळ का लो, कर्के में एक का गुणक ४ है १५४४, सिंह में एक बचा है सिंह
का गुणक १० है १»८१०-१० । मकर में १ बचा है गुणक ५ है १३६ ५3५ कुंभ में
१ है कुंभ का गुणक ११ है १९११११ शेष में ० है । इन सब संख्या ४+ १०+*
--११ का योग किया=३० आया यही राशि पिंड हुआ । इसी प्रकार सबका राशि
पिंड बना लेना ।
ग्रहपिंड बनानां
प्रत्येक ग्रहों के गुणक दिये हैं जिन राशियों में प्रह हो और ऐकाधिपत्य शोधन का
अंक बचा हो उस अंक में उस ग्रह के गुणक से गुणा करना। उस राशि में जितने ग्रह
हों सबका पुथक-पृथक गुणा कर सबका योग रखना । पश्चात् सम्पूर्ण राशियों के इस
प्रकार प्राप्त अंकों का योग कर रखना वही ग्रहपिड है । जैसे मंगल का लिया, सिंह
राशि में शनि है उसमें ऐका० शो० का बचा हुआ १ अंक है । शनि का गुणक ५ है।
१)(४८-५ मकर में गुरु है इसमें १ अंक है। गुरु गुणक १० है। १५१०-१० । कुंभ
में २ ग्रह चन्द्र और बुध है । कुंभ में १ अंक बचा हे । चन्द्र गुणक ५ है १२८ ५-५
बुध गुणक ५ है । १२ ५=५ हुआ । दोनों को जोड़ा ५१५९-1० आया । शेष राशियों
भै ऐ० शो० अंक ० है । अव सब का योग किया ५4 १०४।०=२५ यह सर्व योग २५
ग्रह पिंड हुआ । इसी प्रकार प्रत्येक ग्रहों के ग्रह गुणक द्वारा ग्रहपिड बना लेना ।