भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 454 में से

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१२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फोलत खण्ड

पूर्वेबत्‌ रहेंगे अग्रह का १ लुप्त होकर ० हो गया। २-७ राशि में७ में ० हैतो

दोनों में ० हो गया । ३-६ राशि दोनों अग्रह हैं बड़ी संख्या ४ से छोटी है ३ घटाया

१ रह! यह १ बड़ी संख्या ४ के स्थान में रहा । छोटी ३ पूर्वेवत्‌ रही । ९-१२ राशि

दोनों में ० होने से ० ही रहा है। १०-११ राशि में से ० होने से दोनों शून्य हो गये ।

चन्द्र में १-८ राशि में से १ में ० होने से दोनों में ० हो गया इसी प्रकार २-७

राशि में से १ में शून्य होने से दोनों में ० हो गया। ३-६ राशि दोनों अग्रह हैं एक

बड़ा एक छोटा है बड़ी २ में से १. घटाया १ रहा। बड़ी के स्थान में १ हो गया छोटी

'संख्या १ पूर्ववत्‌ रही । ९-१२ राशि में १ में ० होने से दोनों में ० हो गया इसी `

प्रकार १०-११ राशि में भी ० हो गया ।

मंगळ में १-८ राशि में ० होने से ० हो गया २-७, ३-६, ९-१२ राशि में भी

इसी प्रकार ० हो गया १०-११ राशि दोनों सग्रह हैं पूर्ववत्‌ १-१ ही रहा । बुध

और गुरु में एक में ० होने से सव में शून्य हो गया.। शुक्र में ९-१२ राशि मे १२

सग्रह राशि में एक छोटा अंक है बड़ा २ में छोटा १ घटाया १ बचा वह अग्रह २ के

स्थान में १ हो गया सग्रह एक पूर्ववत्‌ रहा । शनि में १-८ राशि में एक अग्रह, एक

सग्रह है दोनों का १-१ समान अंक है तो अग्रह० हो गया सग्रह १ वहीं रहा । ३-६

राशि दोनों अग्रह है समान अंक ३-३ हैं तो दोनों ० हो गये ९-१२ राशि में १२

राशि सग्रह छोटी, अग्रह बड़ी है । बड़ी २ से छोटी १ संख्या को घटाया तो १ बचा

वह अग्रह संख्या हुई । सग्रह १ पूर्ववत्‌ रही । २-७ राशि और १०-११ राशि में एक

स्थान में शून्य होने से दोनों ० हो गया ।

लग्न में १-८ राशिमें अग्रह २ छोटी सग्रह ४ बड़ी संख्या है तो अग्रह. २ का० हो

गया सग्रह ४ वसा ही रहा । शेष में एक स्थान में शून्य होने से सब स्थानों में शून्य

हो गया । इसमें ककं और सिंह राशि के अंकों को विना शोधन किए रख दिया है।

ऐकाधिपत्य शोधन के पश्चात्‌ बचे हुए अंक में राशि गुणक ओर ग्रह गुणक द्वारा

राशिपिड और ग्रहपिड बनाकर योगपिड बनाना पड़ता है । इसमें ककं व सिंह के भी

अंक लेना ऐका० शो० में जिनको नहीं लिया था:

राशि गुणक

राशि ।१।२।३।४।५।६।७।८।९।१०।११।१२

गुणक ।७।१०।८।४।१०।५।७।८।९।५।११।१२

प्रत्येक राशि को भिन्न-भिन्न बल प्राप्त होता है इसके लिए राशि गुणक द्वारा

जाना जाता है । किसी राशिकी ऐकाधिपत्य शोधन के पश्चात्‌ जो रेखा बच रहे उस

सख्या में उस राशिके गुणक का गुणा करना पड़ता है जिस में ० रेखा बची हों उसका

गुणनफल ० ही आयेगा । जसे मिथुन में सूरय का ऐ० शो० शेष ३ है मिथुन का गुणक

८.है । इससे ३ > ८-२४ आया । इसे उसके नीचे रखा । कन्या का ऐका० शो० १ है

अन्या का गुणक ५ हैं १% ५: ५ आया । वृश्चिक में ४ है गुणक वृश्चिक का ८ है

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