भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 127, कुल 454 में से

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पृष्ठ 127

अष्टक वर्ग विचार : ११९

संख्या को लुप्त कर ० रख देते हैं बड़ी संख्या को छोटी के बराबर कर देते हैं। कोई छोटी के बराबर बड़ी संख्या कर देते हैं ।

(५) दोनों अग्रह या दोनों सग्रह हों या एक अग्रह दसरा सग्रह हो किसी एक में

० हवो तो दोनों में शून्य हो जाना बताया गया है । परन्तु जातक पारिजात आदि में बताया दै कि दोनों में से किसी में शून्य रहे तो ज्यों का त्यो रहेगा । शोधन नहीं |

होगा । चाहे दोनों में से किसी में या दोनों में ग्रह हो या न हो ।

(६) सग्रह छोटी अग्रह बड़ी हो तो बड़े से छोटा घटाकर शेष अग्रह में रहेगा

सग्रह वसा ही रहेगा । परन्तु अन्य का मत है कि छोटी संख्या दोनों में रहेगी अर्थात्‌

सग्रह की संख्यां जो हो वही संख्या अग्रह में रहेगी ।

ऐकाधिंपत्य शोधन चक्र

स्वामी मंगल शुक्र बुध गुरु शनि

राशि १८ ३ ७ ३ ६ १ प १० ११ ग्रह 9 सू० चट

श० गु०

सूयं श्रि शो०

ऐका० शो०

चन्द्र त्रि शो०

ऐ० शोधन

मंगल त्रि० शो०

ऐका० गो०

बुध त्रि० शो०

ऐका० शो०

गुरु० त्रि० शो०

ऐका० शो०

शुक्र त्रि० शो०

ऐका० शो०

शानि०त्रि०्शो ०

ऐका० शो०

लर्न त्रि० शो ०

ऐका० शो०

6 ~ ७

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यहाँ प्रत्येक ग्रहों की रेखाओं का त्रिकोण शोधन करने के पश्चात्‌ जो अंक प्राप्त

हुए हैं वे दिये है । इन्हीं अंकों का ऐका० शोधन करना है । सूयं में राशि ८ में मंगर है

= मग्र हृ में ४, मेष सग्रह में १ है । यहाँ सग्रह बड़ा, अगह छोटा है तो सम्नह के ४

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