भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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११८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

ऐकाधिपत्य शोधन .

अष्टक वगग में प्राप्त प्रत्येक ग्रहों को रेखाओं का त्रिकोण शोधन के पश्चात्‌ ऐका-

धिपत्य शोधन करना पड़ता है। जिन ग्रहों की राशियाँ ( दोस्वगृह ) हैं केवल उन्हीं

का ऐकाधिपत्य शोधन करना पड़ता है। सूर्य चन्द्र को १-१ राशि है इससे उनकी

राशि का शोधन नहीं होता ।

ऐकाघिपत्य शोधन के नियम ये हैं :---

(१) जिस राशि में ग्रह है वह सग्रह राशि हुई । जिस राशि में कोई ग्रह नहीं

हैं वह अग्रह राशि हुई । इसका ध्यान रखकर शोधन करना पड़ता है। किसी ग्रह की २

राशियाँ हैं उनमें ही विचार करना पड़ता है कि अग्रह हैं यहा सग्रह ओर उनके त्रिकोण

शोधन के पश्चात्‌ प्राप्त अंक, दोनों एक बरावर है या छोटा बड़ा अंक हैँ ।

(२ ) जब दोनों अग्रह राशि हो और दोनों के अंक समान हों तो दोनों अंक

लुप्त हो जाथंगे अर्थात्‌ दोनों में ०-० अङ्क रखना पड़ेगा ।

` (३) दोनों राशि अग्रह हों उनमें एक राशि से दूसरी संख्या बड़ी हो तो=

( अधिक-अल्प ) = शेष को बड़ी संख्या के स्थान में रखो छोटी संख्या पूर्ववत्‌ होगी ।

(४ ) एंक सग्रह दूसरा अग्रह दोनों के सभान अंक हों तो अग्रह ० हो जायेगा ।

सग्रह पुर्वेवत्‌ रहेगा ।

(५) दोनों में से चाहे कोई एक अग्रह हो या सग्रह या दोनों सग्रह या अग्रह हों

परन्तु किसी में ० हो तो दोनों ० रख दो ।

(६) अग्रह बड़ा सग्रह छोटा अंक हो तो ( बड़ी संख्या-छोटी संख्या ) शेष संख्या

भंग्रह की होगी: । सग्रह पूर्ववत्‌ रहेगा ।

(७) सग्रह बड़ा अग्रह छोटा अंक हो तो अग्रह ० हो जायगा,सग्रह पूर्ववत्‌ रहेगा ।

(८) दोनों सग्रह हो तो कोई परिवर्तन नहीं होगा ।

(९) यह ध्यान रहे कि सूर्य चन्द्र का ऐकाधिपत्य शोधन नहीं होता क्योंकि इनकी

एक-एक ही स्वराशि हैं । इनका जो अंक त्रिकोण शोधन से प्राप्त हुआ था वहीं अंक

कके और सिंह राशि में ऐकाधिपत्य शोधन चक्र में रख देना चाहिये ।

इसमें कुछ मतान्तर है-जातक पारि० में बताया है कि दोनों में से किसी में शून्य

हो तो दोनों संख्या पूर्ववत्‌ रहेगी यह उपरोक्त ५ के विरुद्ध है जैसे मेष में ० वृश्चिक

में २ हैं चाहे सग्रह या अग्रह हो दोनों पुंवत्‌ रहेंगे अर्थात्‌ मेप ० वृश्चिक में २ ही

ऐका० शो० में रहेगा ।

ऐकाधिपत्य शोधन में मतान्तर

त्रहत्पाराशरी, शंभु होरा प्रकाश आदि के अनुसार ऐकाधिपत्य शोधन करना यहाँ

दिया है परन्तु इसमें कुछ का मत भिन्न है ।

(३) यहाँ दोनों अग्रह राशि हों और संख्या बड़ी छोटी हो तो बड़ी से छोटी को

घटाकर शोष को बड़ी संख्यां के नीचे रखना छोटी पूर्ववत्‌ रहेगी, बताया है। कई छोटी