सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों को दृष्टि का फल : ५
का सौख्य ( जा० भ० ) । भयरहित ( वृ० जा० ) धीर ( जा० पारि० )1
शनि की--धन, स्त्री, वाहन और पुत्रादि से हीन, निन्दक ( जा० भऽ ) । कपड़ा
चुनने वाला ( वृ० जा० ) ।
(४) ककं के चंद्र पर दृष्टि
सूर्य की--निष्प्रयोजन नीच जाति के मनुष्यों से क्लेश, राजा के आश्रय से किले
मपर अधिकार करने वाला ( जा० भ० ) । नेत्र रोगी ( वु० जा० ) ।
मंगल की-- चतुर, श्रवीर, माता के विरुद्ध, दुर्बल देह ( जा० भ० )। युद्ध
जीतने वाला योद्धा ( वु० जा० ), पराक्रमी ( जा० पारि० ) ।
बुध की--स्त्री धन पुत्र की उन्नति, नीति के सौख्य सहित, सेना का स्वामी या
राजा का मंत्री ( जा० भ० )। कविता करने वाला ( वृ० जा० ) विद्वान् (फल) ।
गुरु की--राजा से अधिकार प्राप्त, गुणवान्, नीति का जानने वाला, सुखी, श्रेष्ठ
पराक्रम वाला, राजा ( जा? भ० ) पंडित ( वृ० जा० ) चतुर (फल०) ।
शुक्र की-श्रे ष्ठ रत्न और सुवणंयुक्त, रत्न आभूषण व श्रेष्ठ स्त्री का निरन्तर
सुख ( जा० भ० ) । राजा ( वृ० जा० ) ।
शनि की--सत्य रहित, माता का विरोधी, सदा भ्रमण, पाप में तत्पर, धनहीन ( जा० भ० ) शस्त्र का व्यापारी वु० जा० ) लोहा आदि का व्यापारी
( फल० ) ॥
(५) सिंह के चंद्र पर दृष्टि
सूर्य की--गुणयुक्त, सदा राजा का प्यारा, अधिकार को प्राप्त, विलम्ब से सन्तान
प्राप्ति ( जा० भ? ) 1 राजा ( वृ० जा० ) ।
मंगल की--राजा या मंत्री, धन वाहन पुत्र स्त्री के सुख से युक्त ( जा० भ० )
राजा ( वृ० जा० ) ।
बुध की--धन स्त्री तथा वाहन पुत्रादिकों के सुख से पूर्ण (जा० भ०) । ज्योतिषी
( वृ० जा० )।
गुरु की-बहुश्रूत, साधु वृत्त, भूलने वाला, राजा का मंत्री ( जा० भ० ) । धनी
( वृ० जा० ) ।
शुक्र की-स्त्री प्रयुक्त, वैभव सहित, गुणवान् गुणों को जानने वाला, चतुर
“विधियों को जानने वाला ( जा० भ० ) । राजा ( वृ० पा० )।
शनि की-स्त्री रहित, खेती में चतुर, राजा के किले का स्वामी, थोड़ा धन
( जा० भ० ) । पापी ( जा० पारि० ) । नाई ( फल० ) 1
(६) कन्यो के चन्द्र पर दृष्टि डु
सूर्य की--राजखंजाने का मालिक, श्रेष्ठ वृत्ति वाला, स्त्री रहित, भक्ति में
तत्पर ( जा० भ०.)। स्त्री के आश्रय से जीवन ( वृ० पा० ) । राजा ( फल० ) ।
सुखी ( जा० पारि० ) ।