भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

मंगल की--हिंसा में तत्पर, शूरवीर, क्रोध सहित, राजा का आश्रय करने वाला,

संग्राम में जय प्राप्ति ( जा० भ० ) । स्त्री के आश्रय से जीवन ( वृ० जा० )। चतुर

( फल० ) । धनिक ( जा० पारि० ) । ही

वध की--ज्योतिष शास्त्र और काव्य तया संगीत विद्याओं का ज्ञाता, चतुर,

संग्राम में यश प्राप्ति, नम्रता सहित ( जा० भ० )। राजा ( वृ० जा० ) । विभु

( जा० पारि० ) । हु सद

गुरु की--वहुत भाइयों वाला, राजा का प्यारा, श्रेष्ठ वृत्ति से सुन्दर यश वाला

( जा० भ० ) । सेनापति ( वृ० जा० ) । प्रभु सदृश ( जा० पारि ) ।

शुक्र की--वेश्या विलास में चित्त, स्त्री का आश्रित, राजा से धन प्राप्त ( जा० भ० ) | सब बातों में निपुण ( वृ० जा० ) । विद्वान्‌ ( जा० पारि० )।

शनि की--धनहीन, बुद्धिरहित, निरन्तर स्त्री के आश्रय से धन प्राप्त करने

वाला, माता से हीन ( जा० भ० )। स्त्री के आश्रित जीवन ( वृ० पा० )। राजा

(फल०) शक्ति रहित ( जा० पारि० ) ।

(७) तुला के चन्द्र पर दृष्टि

सूर्य की दृष्टि--सदा भ्रमणकर्त्ता, सुख और धन से हीन, श्रेष्ठ स्त्री और पुत्रों से रहित, मित्र और शत्रुओं से सन्ताप ( जा० भ० ) । जीवघांती ( वृ० फो० ) ठग ( जा० पारि० ) । दुष्ट ( फल० ) । मंगल की--बुद्धि से दूसरे के धन में चित्त, माया सहित, विषयों से सन्ताप ( जा० भ० )। जोवघाती (वृ० जा०) । ठग (जा० पारि«) । शठ ( फल दीप ) । वुध की-कलाओं का ज्ञाता, धन धान्य सहित, वोलने की विद्या और वैभव सहित ( जा० भ० ) । राजा ( वृ० जा० )।

गुरु की-वस्त्र ओर भूषण के कायं में चतुर, इनके खरीदने बेचने में चतुर ( जा० भ० ) । सुनार ( वृ० जा० ) । री

शुक्र की--अनेक उद्यम से अर्थ सिद्ध करनेवाला, राजाओं का कृपापात्र, प्रसन्न चित्त, पुष्ट देह ( जा० भ० ) । व्यापारी वैश्य ( वृ० जा० ) । शनि की-धनधान्य श्रेष्ठ वाहनों से युक्त, विषय भोग से रहित, ( जा० भ० ) । जीवघाती ( वृ० जा० ) | चुगलखोर ( फल० ) । ठग ( जा० पारि० ) । (5) वृश्चिक के चन्द्र पर दृष्टि

सूर्य की--श्रेष्ठ वृत्ति रहित, धनवान्‌, मनुष्यों को असह्य, अत्यन्त उद्यम करने वाला, सेना में रहने वाला ( जा० भ० ) धनहीन दरिद्रो ( वृ० जा० ) ।

मंगल को- युद्ध में विशेषकर यश को प्राप्त; गंभीरता और गौरव से राजा की कृपा से धन पैदा करने वाला ( जा० भ० )। राजा ( वृ० जा० ) । राजा का मन्त्री ( जा? पारि० )।

बुध की--बोलने में चतुर, युद्ध करने वाला, गीत और हत्या में तत्पर, निरन्तर झूठ कर्मों में चतुर ( जा० भ० ) । यमल (जुड़वां लड़कों) का पिता या २ पिता