भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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ग्रहों की दृष्टि का फल : ७

(वृ० जा०) । २ माता (जा० पारि)।

गुरु की--संसार की इच्छा के समान चलने वाला, सुन्दर रूप, श्रेष्ट कमं, धन

और भूषण युक्त (जा० भ०) । दृष्टि से नम्र (वृ० जा०) । राजा (फल०) । राजप्रिय

(जा० पारि०) ।

शुक्र की-- प्रसन्नचित्त, उदार यश, छल-छिद्र का ज्ञाता, धन वाहनों से युक्त

मित्रो से धन कपट (जा० भ०) । धोबी (वृ० जा०) । नीच कर्म (जा० पारि०) ।

शनि की--कोई अंग विकृत ( फल० )। अंगहीन ( वृ० जा» ) । रोगी ( जा०

पारि०) ।

( ९) धन के चन्द्र पर दृष्टि

सूर्य की--बड़ा प्रतापी, उत्तम यश, सम्पदा युक्त, श्रेष्ठ वाहन, संग्राम में यशस्वी,

राजऊपा युक्त (जा० भ०) । पाखण्ड धर्म वाला (वृ० जा०) । दरिद्र (जा० पारि०)।

मंगल की--सेना का स्वामी, वड़ा प्रताप वाला, लक्ष्मी का स्थान, आभूषणों का

लाभ (जा० भ०) । पराये कार्य में विमुख (वृ० जा०) । दगाबाज (फल०) ।

बुध की--श्रेष्ठ वाणी के विलास और बहुत नौकरों वाला, ज्योतिषी, शिल्प

विद्या जानने वाला, (जा० भ०) । स्वकुळ में श्रेष्ठ (वृ० जा०) । स्वजन रक्षक

(फल०) ।

गुरु की- वड़ा अधिकार प्राप्त, धनवान, श्रेष्ठ वृत्ति, सुन्दर शरीर (जा० भ०) ।

राजा (वृ० जा०) ।

शुक्र की--संतान धन धर्म प्राप्त, निरन्तर सोख्ययुक्त (जा० भ०) । कई पुरुषों

को आश्रय देने वाला (वृ० जार) ।

शनि की--बल युक्त, सदा शास्त्र में आसक्त, श्रेष्ठ वक्ता, प्रचंड प्रतापी

(जा० भ०) । दंभी, झूठा (वृ० जा०)। शठ (फल०)। शुभ दृष्टि से विद्या

ज्ञान तथा धन में बली । पाप से सभा शठ, वेश्याओं का प्रेमी (जा० पारि०) ।

(१०) मकर के चन्द्र पर दृष्टि

सूर्यं की--धनहीन, मलिन, भ्रमण का प्रेमी, बुद्धि हीन, दुदिन

(जा०भ०) । दरिद्री (वृ० जा०) ।

मंगल की- अत्यन्त प्रचण्ड, धन वाहन, युक्त, चतुर, स्त्री ओर पुत्रों से

युक्त, निरन्तर वैभव युक्त (जा० भ०) | राजा तुल्य (वृ० जा०) ।

बुध की--बुद्धि हीन, धन रहित घर का त्यागने बाला, स्त्री पुत्रों से त्यक्त

(जा० भ०) । राजा (वृ० जा०) 1

गुरु की--राज्य पुत्र एवं सत्य सहित, गुणों को जानने वाला, स्त्री पुत्र

युक्त, राजा (वृ० जा०) ।

शुक्र की--सुन्दर नेत्र, धन वाहन युक्त, पुत्र, भूषण, वस्त्र का सुख

(जा० भ०) । विद्वात्‌ पण्डित (वृ० जा०) ।