भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अष्टक वर्ग विचार : १२५

जातक पारिजात के मत से ऐकाधिपत्य शोधन करना त्रिकोण शोधन में कोई अन्तर नहीं है परन्तु ऐकाधिपत्य शोधन में कुछ अन्तर है । यहाँ ऐका० शो० के नियम फिर से दिये जाते हैं । (१) दोनों अग्रह समान अंक-दोनों के अंक लुप्त होंगे ०-० होगा । * (२) दोनों अग्रह अंक भिन्न हों-छोटी के बरावर बड़ी संख्या कर देना । (३) एक अग्रह दूसरा सग्रह-समान अंक=अग्रह ० होगा । सग्रह पूर्ववत्‌ । *$ (४) किसी में ० हो चाहे अग्रह या सग्रह हो परिवर्तन नहीं होगा । # (५) अग्रह बड़ा सग्रह छोटा-छोटी संख्या के बराबर दोनों में रहेगा । (६) सग्रह बड़ा अग्रह छोटा-सग्रहृ पूर्ववत्‌ रहेगा ।अग्रहलुप्त ० होगा । (७) दोंनों सग्रह में परिवर्तन नहीं होगा । + चिल्ल में पूर्व बताये नियम से अन्तर है । ऐकाधिपत्य शोधन चक्र स्वामी मंगल शुक्र बुध गुरु शनि, राशि १८ २७ ३६ ९ १२ १० ११ ग्रहृ . « में. 5३ लग्न, . सू. गु. चं.

शु. ES सूयं भ्रि०शो० १४ २० TEC

ऐका० शो० ०४ २० ३ ३ ० ० ० १

चन्द्र निण्गो७ ०३ ०१ ५१ ५ २ ० २ ० ऐ० शो० ०३ ०१ १ १ २ ० २ ०

मंगल त्रि शो० ०२ २० २० १ ० १ १ ऐका० शो० OR २6 ३१० सप ? १ बुधभिएगो० ०४ २० जज एका० शो० ०४ ०० ४ ० ० ० ० २

गुरु त्रि0 शो० ०१ ०२ १० ३ ० १ ० ऐका० शो० ०१ ०२ ee १० ३ ० १ ० _ >. गुक्न त्रि शो ४० ०५ २० २ १ 1 o ऐका० शो० ४० ०५ २ ० १ १ १ ० शनि त्रि शो० ११ ०३ ३ ३ २ १ ¥ ० ऐका० शो० ०० ०३ ० ० १ १ ४ ०

ल्नव्रिणिशोी २४ २० 10 पृ २ ल्ल °. ऐका० शो० ०४ २० १ ० ०--० २ ०