सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 138, कुल 454 में से
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१३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
अष्टक वरग से विचार
१ सूर्य से--आत्मा, स्वभाव, शक्ति और पिता के दुःख सुख का विचार होता है।
२ चन्द्रसे--मन, वुद्धि, प्रसन्नता और माता का विचार ।
` ३ मंगल से--भाई, बल, गुण और भूमि का ।
४ वुध से-वाणिज्य जीविका और मित्र का ।
५ गुरु से--देह की पुष्टि, विद्या, धन सम्पत्ति का ।
६ शुक्र से--विवाह, भोग, वाहन,वेश्या या अपनी पत्नी के भोग का ।
७ शनि से--आयुर्दाय, दुःख, शोक, भय, हानि, जीवन का उपाय, मरण ।
जन्मसमय में ग्रह जिस स्थान में हो वहाँ से गिनने पर स्थान का विचार
१ सूयं से नवम स्थान द्वारा-पिता आदि का विचार करना ।
२: चन्द्र से चतुर्थ स्थान द्वारा-माता आदि का विचार करना ।
३ मंगल से तृतीय स्थान द्वारा--भाई आदि का विचार करना ।
४ बुध से चतुर्थं स्थान द्वारा--पुत्र, धन आदि को विचार करना ।
५ बुध से पंचम स्थान द्वारा--विद्या, वुद्धि आदि का विचार करना ।
६ गुरु से पंचम स्थान द्वारा- पुत्र, धन आदि का विचार करना ।
७ शुक्र से सप्तम स्थान द्वारा - स्त्री आदि का विचार करना । ८ शनि से अष्टम स्थान द्वारा-आयु आदि का विचार करना ।
जिस भाव का फल विचारना हो उस भाव की रेखा संख्या में उस ग्रह के अष्टक- चगे के योग हिंड से गुणाकर २७ का भाग देना जो शेष बचे अश्विनी को आदि लेकर उस संख्या के नक्षत्र पर जब शनि जायगा उस समय उस भाव की हानि होगी या उस
भाव सम्बन्धी बातों का कष्ट होगा ।
या ठस नक्षत्र के त्रिकोण ( १० वाँ या १९ वां नक्षत्र ) में जव शनि जावे तब कष्ट होगा ।
सूर्य के अष्टकवगं से विचार
( १) सूर्य जिस राशि में हो उस राशि को पितु गृह कहते है । सूयं के अष्टकवर्ग से पिता का विचार होता है ।
( २ ) जन्म में सूर्य लग्नगत हो वह नीच या शत्रु गृही हो उसमें सूर्य की २,३रेखा हो तो जातक रोगी हो । ८ परन्तु लग्नस्थ सूर्य उच्च या स्वगृही हो उस राशि में ५ या अधिक रेखा हों तो * चह राजा तुल्य हो और दीर्घायु हो ।
(३) यदि सूर्य केन्द्र या त्रिकोण गत हो उस राशि पर ५ रेखाएं पडी हों तो जातक या उसके पिता की मृत्यु ३४ वें वर्ष में होती है । सूर्य स्थिर राशि में ६ रेखा हो-२२ वर्ष में मृत्यु । ७ रेखा=३० वर्ष में । ८रेखार ३६ वर्ष में मृत्यु हो ।
'ऐसे योगों में अग्नि, जळ, पर्वत या श्मशान द्वारा मत्यु होती है ।
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