भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 454 में से

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अष्टक वर्ग विचार : १३१

छ (४) अन्य मत है कि सूर्य पंचम या नवम घर में हो सूर्य अष्टक० में उस राशि

में जितनी रेखा हों उस संख्या की अवस्था में जातक के पिता की मृत्यु हो जसे १ रेखा

हो तो १ वर्ष में २ रेखा तो २वपं में आदि | द

( ५) सूर्य केन्द्र में मित्रगृही हो और उसकी राशि में केवल ३, ४, ५, रेखाएं हों

तो उसके पिता को १७वें वपं में अति क्लेश होता है कभी मृत्यु भी हो जानी है ।

( ६) सूर्यं पंचम में हो उस राशि में ८ हीं रेखा हों और लग्न से राहु नवम हो

तो जातक के ५ वर्ष की अवस्था में हीं उसके पिता की मृत्यु हो जाती है ।

(७) सूर्य लग्न से तीसरे हो उस राशि में ३ या ४ रेखा हों और यदि लग्न से

नवम स्थान में कोई पाप ग्रह हो तो जातक के२० वपं पूर्व ही उसके पिता की मृत्युह्द ।

( ८ ) सूर्य केन्द्र में हो या ९ वा १२ वीं राशि में हो ओर गुरु सूयं के साथ हो

सूर्य उस सीमा के मध्य द्रेष्काण में हो और उस सूर्य की राशि में ३से ७ तक रेखा

हों तो जातक १०० योजन पृथ्वी का स्वामी होता है ।

( ९ ) सूर्य केन्द्र में हो और शनि बुध चंद्र एक साथ हों और. सूर्य राशि में ५

रेखा हों तो जातक की १० वषं आयु के पश्चात्‌ पिता को राज्य लक्ष्मी प्राप्त हो या

चड़ा अधिकारी हो ।

(१०) सूर्यं राशि में रेखा शून्य हो उस राशि में जब सूर्य जाता है, उस सौर

मास में कोई शुभ कार्य या मंगल कार्य विवाहादि का आरम्भ करना मना है।

ये सब वातें सूर्य अष्टकवगं गोचर के सूर्य की राशि की रेखा से विचारना ।

सूर्य अष्टकवगं से पिता का विचार

जन्म समय जिस राशि में सूर्य हो उससे नवम स्थान पिता का होता है इसलिए

सूये अष्टक में उस राशि की अष्ट० रेखा संख्या में उस ग्रह के योगपिंड से गुणाकर २७

का भाग देना । जो शेष बचे अश्विनी से गिनकर उस नक्षत्र में जब शनि आयगा तब

पिता को कष्ट होगा। या उसके त्रिकोण (१-१०-१९ वें नक्षत्र में जब शनि आयेगा तब

पिता या पितु तुल्य चाचा आदि पालन करने वाळे का मरण या क्लेश होगा । या

अनहोनी वात होगी ।

जैसे सूर्यं मीन राशि में है उसकी नवम राशि वृश्चिक है । अतः सूर्य के अष्ट० में.

वृश्चिक राशि में देखा ७ रेखा हैं इसमें सूर्ये का योगपिंड ९३ का गुणाकर २७ का

भाग दिया । ७% ९३६५१ २७=२४दूङ=शेष ३ कृतिका । इससे कृतिका या उससे

त्रिकोण या १० वां उत्तरा फाल्गुनी या १९ वां उत्तराषाढा नक्षत्र पर जब शनि

आयगा तब पिता को बलेश या मरण होगा । उस समय अशुभ दशा आदि हो तो मरण,

शुभ दशा हो तो क्लेश होगा ।

अन्य प्रकार--सूर्य की उक्त राशि अष्ट० रेखा % योगपिड-:-१२-शैष राशि में या

उससे त्रिकोण में जब शनि जावे तब पिता को कष्ट या मरण होगा जसे उक्त ७ रेखा

योगपिंड ९३८६५१ +- १२=५४३ इ=शेष रेराशि=मिथुन या इसके त्रिकोण की राशि

तुला या कुंभ राशि में जब शनि जायगा तब पिता का मरण या कष्ट होगा ।

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