भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१३४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

योगपिंड से गुणाकर १२ का भाग देना जो शेष बचे उस राशि का उसके त्रिकोण में जब

शनि जावे तब माता को कष्ट होता है।

जैसे चन्द्र से चतुर्थ में वृष राशि है । इस वृष राशि से अष्टम में धन राशि है चंद्र

अष्ट० में घन राशि में ७ रेखा हैं । चंद्र का योगपिंड ३६ है ३६% ७८२५२ -+ १२८

२१३६ ६-शेष मीन राशि आई इसके त्रिकोण में ककं और वृश्चिक राशि है । इन

राशियों में गोचर में जब शनि जायगा तब माता को कष्ट होगा ।

( ३ ) यदि उसी समय अभ्यन्तर चन्द्रमा स्थित राशि से या लग्न से चतुर्थ में मंगल

या शनि गोचर में पड़ता हो या चन्द्रमा लग्न से चतुथं स्थान पर मंगल व शनि की

दृष्टि हो तो माती की मृत्यु होती है ।

यदि जातक की माता न हो तो स्वयं जातक को इससे मृत्यु का भय होता है। या

देशान्तर में गमन करने से वहीं मृत्यु होतो है।

(४) जन्म का चन्द्र यदि सप्तम, अष्टम या द्वादश स्थान में हो और चंद्र स्थिति

राशि में चन्द्र अष्ट० में ३ या कम रेखा हों तो वाल्यावस्था में माता की मृत्यु हो या

माता जीवन पर्यन्त रोगी रहे ।

(५) जन्म का चन्द्र केन्द्र में हो या द्वादश स्थान में हो. और चन्द्र स्थित राशि में

चन्द्र अष्ट० में ३ था कम रेखा हों तो जातक के छठे वर्ष माता की मृत्यु होती है ।

(६) चन्द्रमा से ४-८ भाव में मंगल, ५-९ भाव में सूर्य हो तो माता का वियोग

हो लग्न से ऐसा योग हो तो पिता को मरण कहुनां ।

चंद्र का अष्टक वर्ग फल

(१) जन्म का चंद्र लग्न में हो और चन्द्र अष्ट में चन्द्र स्थित राशि में यदि १,२

या ३ रेखा पड़े तो जातक निबंछ और रोगी होता है कभी क्षय रोग भी हो जाता है

(२) चन्द्र लग्न में हो और चन्द्रमा के साथ यदि २ या ३ ग्रह बठ हों तथा उस

चन्द्र स्थित राशि में २ या ३ रेखा चन्द्र अष्ट० में हों तो जातक की मृत्यु ३७ वें

वषं में हो ।

(३) जन्म का चन्द्र त्रिकोण या लाभ भाव गत क्षीण, शत्रुगृही या नीच हो और

चन्द्र अष्ट० में उस राशि की २-३ रेखा हों तो चन्द्र स्थित भाव की हानि होती है

अर्थात्‌ पंचम स्थान में चन्द्र हो तो पुत्र की हानि, लाभ में हो तो लाभ की हानि आदि

होती है। यदि उपरोक्त योग में चन्द्रमा क्षीण न हो और ४ या अधिक रेखा हों तो चंद्र

स्थित राशि का फल अच्छा होगा । भाव फल की वृद्धि होगी ।

(४) लग्न में क्षीण चन्द्र हो चन्द्र स्थित राशि में चन्द्र के अष्ट० में ३ या ३ से

कम रेखा हों तो दमा की बीमारी हो ।

(५) चन्द्र केन्द्र मे हो चन्द्र अष्ट० में उस राशि को ८ रेखा मिली हों तो वह विद्वान्‌, धनी, माननीय, बली, ख्यातियुक्त नृपतुल्य होता है । (६) चन्द्र अष्ट की किसी राशि में सबसे अधिक रेखा हों । और किसी अन्य

पुरुष का जन्म उसी राशि में हो तो उससे किसी प्रकार का सम्बन्ध करने या मित्रता