भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१४८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

बदलती रहती है । इससे कुण्डली के फल से गोचर का फल भिन्न है।

ग्रहों के शुभ स्थान

म राशि से कौन ग्रह कब-कब अच्छा फल देते हैं इसका विचार नीचे दिया

है चन्द्र ( राशि ) से इन स्थानों की गिनती दी है।

१ सूर्य-३, ६, १० और ११ वे घर में अच्छा फल देता है।

२ चन्द्र-१, ३, ६, ७, १०, ११ वे घर में भी अच्छा फल देता है।

शुक्ल पक्ष का चन्द्र= २, ५, ९ वे घर में अच्छा फल देता है।

३ बुध-र, ४, ६, ८, १०, ११ वे घर में अच्छा फल देता है।

४ गुरु-२, ५ ७, ९, ११, वे घर में अच्छा फल देता है ।

५ शुक्र-१, २, ३, ४, ५, ८, ९, ११, 1२ वे घर में अच्छा फल देता है ।

इन स्थानों के अतिरिक्त इतर स्थान अशुभ हैं, जहाँ ग्रह अशुभ फल देगा ।

इन शुभ स्थानों में ग्रह हो तो शुभ है परन्तु इनके वेध स्थान भी हैं जिनमें यदि

ग्रह हो तो शुभत्व नाश हो जाता है। वेध स्थान नीचे दिये हैं ।

वेध स्थान

ग्रह शुभ स्थान वेध स्थान

१ सुयं-३, ६, १०, ११ वाँ स्थान ९, १२, ४, ५ वाँ स्थान

२ चन्द्र-१, ३, ६, ७, १०, ११ वाँ स्थान ५, ९, १२, ४, ८ वाँ स्थान

३ चन्द्र शुक्ल पक्ष मे-२, ५, ९, वाँ स्थान ६, ४, ८ वाँ स्थान

४ बुध-२, ४, ६, ८, १०, ११ वाँ स्थान ५, ३, ९, १, ८, १२ वाँ स्थान

५ गुरु २, ५, ७, ९, ११ वाँ स्थान १२, ४, ३, १०, ८ वाँ स्थान

६ शुक्र-१, २, ३े, ४, ५, ८, ९, ८, ७, १, १०, ९, श्र ११, ३,

११, १२ वाँ स्थान ६ वाँ स्थान

७ मंगल शनि राहु ३, ६, ११ १२, ९, ५ वाँ स्थान

स्पष्टी करण-- (१) सूर्यं का शनि पुत्र है पिता पुत्र का विचार नहीं होता अर्थात्‌

सूर्य के वेध स्थान में यदि शनि हो तो अशुभ नहीं होता क्योंकि वेध स्थान में कोई ग्रह

हो तो शुभत्व मिट जाता | है इससे सूर्य|-शनि का वेध होना नहीं माना

जाता है।

(२) इसी प्रकार चन्द्र. वुध का परस्पर वेध नहीं होता ( वेध, होने पर भी वेध

नहीं मानते ) अर्थात्‌ सूर्यं का शनि से और शनि का सूर्ये से या चन्द्र का वुध से भौर

वुध का चन्द्र से वेध होने पर भी वेध नहीं माना जाता अर्थात्‌ शुभत्व दूर नहीं होता

क्योंकि साधारणतः यहाँ बताये वेध स्थानों में कोई भी ग्रह हो तो वहाँ उस ग्रह का वेध

होना माना जाता है जिससे शुभत्व दूषित हो जाता हे अर्थात्‌ वह स्यान शुभ नहीं माना जायगा ।

उदाहरण--जैसे कोई भी जन्म राशि से यदि तीसरे स्थान में सूयं हो तो शुभ

फल होगा ऐसा माना जाता है परन्तु सूर्य के तीसरे स्थान के वेध स्थान में देखना