भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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गोचर विचार : १४७

चन्द्र स्पष्ट १०--२--७--५५। ५-५-२७ का नवाश ११ कुंभ राशि आई

न७---३---२०

१७---५--२७

अध्याय ६

गोचर विचार

गोस्तारा, चरस्संचार सूर्यादि ग्रहों की दैनिक गति के भ्रमण से जो ग्रहों को

स्थिति प्रकट होती है उसे गोचर कहते हैं । -

जन्म कुण्डली में जो ग्रह दिये हैं वे वहाँ स्थिर हैं पंचांग के अनुसार वे ग्रह

चतंमान में कहाँकहाँ पर हैं इस विचार को गोचर कहते हैं ।

अर्थात्‌ जन्म चन्द्र की स्थिति के विचार से वर्तमान में ग्रहों की स्थिति के सम्बन्ध

से भविष्य के फल विचार को गोचर विचार कहते हैं । जन्म राशि-जन्म समय चन्द्र

जिस राशि पर हो उसे ही जन्म राशि कहते हैं ।

गोचर फल का विचार :

गोचर का फल विचारने को यह देखना पड्ता है कि जन्म राशि से वर्तमान में

(पंचांग के अनुसार) कौन-कौन ग्रह कौन-कौन स्थान में हैं जेसे किसी जन्म कुण्डली में

चन्द्रमा कुम्भ राशि पर है तो उसकी राशि कुम्भ कहलाई । अव पञ्चांग देखा

संवत २० १८ के कातिक कुष्ण अमावस्या को वहाँ दिये कुण्डली अनुसार ग्रह है ।

72222] यहाँ कुम्भ ११ जहाँ दिया है वहाँ

से प्रत्येक ग्रहों के स्थान देखा। वहाँ से

६ स्थान में राहु है, नवम स्थान में चन्द्र

सूर्य, बुध, शुक्र है । दशम स्थान में मंगल ।

ग्यारहवे' स्थान से शनि । वारहवे स्थान

में गुरु और केतु हँ । इनकी गति के अनुसार

स्थान बदलते रहते हैं। आगे दिया है

| कि किस स्थान में कौन ग्रह होने से

क्या फल होता है उस चन्द्र से ग्रह का फल प्रकट हो जायगा कि किस ग्रह का प्रभाव

इस समय अच्छा है किस का वुरा है ४

में ग्रहों की स्थिति के अनुसार फळ कहा जाता है कुण्डली में ग्रहों की

स्थिति सदैव काल के लिये स्थिर कर दी जाती है परन्तु गोचर में उन ग्रहों की स्थिति