भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१४६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड र

जैसे सूर्य स्पष्ट ११-५-४०-४५। राहु स्पष्ट २-८-६-३२, सूर्य की कला ३०-१४०--४५ ५ राहु कला ४००६'--३२”“-८२३० ५८४६--१ ५० ८२३०५८४६,--१४ --- २१६०० (१२ राशि की कला ) -३०१०२--२७” रा० रा ० ' रात ७. 2

=२-२-३०-२७तमूर्य स्पष्ट पर ११--५--४०--४५=१-९-११--१२

इस स्पष्ट पर सूर्य जाने पर मृत्यु संभव है ।

(७) सूर्य स्पष्ट की कला % मंगल स्पष्ट की कछा-गुणन फल 5-१२ राशि की कला २१६००=लब्धि कला की राशि आदि बनाकर सूर्य स्पष्ट में जोड़ना । उस स्पष्ट के तुल्य सूर्य आने पर या उसके त्रिकोण राशि में सूर्यं आने पर क्लेश एवं क्षय होगां।

रा० ०

जैसे सूर्य स्पष्ट ११--.५--४०(--४५” की कला २८१४०४५” > भौम स्पष्ट

रा०

७०१२-२९-४४” की कला १३३४९'-४४/-२६८८७७६१'४-३८ उक्त गुणन फल

रा ०

+१२ राशि की कला २१६००८-१ २४४८--२ % ६--२७ - २८--२+

रा ०

सूर्य १९---५--४०--४४”“-६---३---८---४७ इनका सूर्य गोचर में होने पर क्लेश आदि होगा ।

(८) लग्न के द्वादशांश के त्रिकोण में जव सूर्य जावे तब मरण संभव होगा।

(९) था अष्टमेश के त्रिकोण में जब सूर्यं जावे ८ A

(१०) या अष्टमेश के त्रिकोण में जब चन्द्र जावे या अष्टमेश गत नवांश के

त्रिकोण में जब चन्द्र जावे उस दिन अल्प रेखा भी हो तो मृत्यु निश्चित जानो ।

(११) या ६-८-१२ भावेशों के स्पष्ट के योग करने से जो आवे उसमें जब शनि

जावे या उसके त्रिकोण में शनि जावे तव मृत्यु संभव है ।

(१२) निधन लग्न-जन्म लग्न स्पष्ट और चन्द्र स्पष्ट के नवांश से ६५ वें नवांश

को जिस राशि में लग्न या चन्द्र हो उस समय मरण संभव है । उस समय रेखा शून्य

हो और दुष्ट ग्रह की दशा हो तव उस लग्न में मृत्यु संभव है या जन्म लग्न से दूसरी

या सप्तम राशि के लग्न में उक्त फल हो । एक नवांश ३-२० का होता है ६४ वें

रा०

नवांश में ७--३--२० अधिक हो जाते हैं । इससे इतने जोड़ने पर ६५ वाँ नवांश आ जाता है।

जैसे २--२०--११--५३ हे-९--२३--३१ का नवांश ५ सिंह राशि आई

प७--३--२०

६--२३--३ ५