भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 454 में से

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अष्टक दर्ग विचार : १४५

(८) लग्न अ० वर्ग में लग्न से मंगल तक २५ रेखा हैं मंगल से लग्न तक ३५

रेखा हैं इन वर्षों में शत्रु पीड़ा रोग आदि से कष्ट होगा ।

(९) लग्न अ० वर्ग से लग्न में गुरु तक ३३ रेखा और गुरु से लग्न तक २५

रेखा हैं इन वर्षों में फल शुभ होगा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

इन सभयों में शुभ या पाप ग्रहों के योग से फल में भी प्रभाव पड़ेगा पाप ग्रह के

अष्टक वग में पाप ग्रह के योग से वहुत अशुभ होगा । शुभ ग्रह के अष्टक वर्ग में शुभ

ग्रहों के योग से शुभता बढ़ेगी । दोनों प्रकार के ग्रह हों तो मिश्रित फल होगा।

अरिष्ट जानना

(१) अष्टमेश जिस राशि में हो उसके त्रिकोण शोधन फल से अष्टम स्थान की

शुभ रेखा से गुणा कर १२ से भाग देना शेष राशि या उसके त्रिकोण के सौर मास

में अरिष्ट होगा ।

इसी प्रकार मातृ पितृ भाव से उससे अष्टम स्थान की गणना कर उसके अरिष्ट

का समय उपरोक्त प्रकार से निकालना ।

जैसे अष्टम में मकर राशि है अष्टमेश शनि सिंह राशि में है । लग्न अ० वर्ग में

मकर की शुभ रेखा ५ है सिंह में त्रिकोण शोधन के पश्चात्‌ १ रेखा प्राप्त हुई है

५ १=५--१२=शेष ५ सिंह या इसके त्रिकोण की राशि धन,मेष के सूयं में अरिष्ट

होगा । ः

(२) शनि से लग्न के अ टमेश तक रेखा जोड़कर अष्टम स्थान की रेखा से गुणा

कर १२ का भाग देने से जो शेष राशि या उसके त्रिकोण की राशि आवे उसमें सूर्य

जाने से अरिष्ट होगा ।

(३) जिस जन्म लग्न में ९, १२ राशि का राहु हो उसमें या उसके त्रिकोण में

जव गोचर का गुरु आवे तव अरिष्ट संभव है । या जिस राशि में राहु युक्त हो उस

राशि के त्रिकोण में जव शनि गोचर में आवे तब अरिष्ट संभव है ।

(४) षष्ठेश जिस नक्षत्र में हो उस राशि नक्षत्र से त्रिकोण में जव शनि जावे तव

मरण संभव है ।

जैसे यहाँ षष्ठंश मंगल वृश्चिक में अनुराधा नक्षत्र में त्रिकोण में उ० भाद्र० और

पुष्य है इनमें शनि जाने पर मरण तथा अरिष्ट संभव है । यदि प्रबल दीर्घायु योग

हो तो अपने समान अन्य करिसी को अरिष्ट आदि हो ।

(५) चन्द्रमा से या लग्न से तीसरे उपकरण में गुरु हो तो उस अ० कोण का जो

स्वामी है उसके त्रिकोण में जव शनि आवे उस वर्ष विवाद, परदेश गमन, और मृत्यु

तुल्य शरीर पीड़ा होती है । |

(६) अष्टमेश जिस द्वादशांश में हो उसके त्रिकोण में जब राहु जावे उस समय

अष्टमेश गत राशि के त्रिकोणस्थ सूर्य में मृत्यु संभव है एवं- स्पष्ट सूर्यं की कला ५

राहु को कला बनाकर-:-१२ राशि की कला=छब्धि अंश फलादि जो आवे उसे स्पष्ट

सूयं में जोड़ने से जो आयगा उस तुल्य सूर्य स्पष्ट में मरण संभव । -

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